रायपुर: छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपये के शराब घोटाले मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस अरविंद वर्मा की बेंच में हुई सुनवाई में लखमा की तरफ से एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
लखमा के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि साल 2024 में केस दर्ज किया गया और डेढ़ साल बाद गिरफ्तारी हुई, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट को बताया गया कि उन्हें सिर्फ बयानों के आधार पर आरोपी बनाया गया और यह राजनीतिक षड्यंत्र के तहत किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि:
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ईडी ने लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था।
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अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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जांच में सामने आया कि लखमा के संरक्षण में विभागीय अधिकारियों, सहयोगियों और ठेकेदारों के माध्यम से घोटाला किया गया। इस घोटाले में कुल 64 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।
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कुल चार चार्जशीट अदालत में पेश की गई हैं।
शराब घोटाले की कहानी:
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तत्कालीन भूपेश सरकार के दौरान पूर्व IAS अनिल टुटेजा, उनके बेटे यश टुटेजा और अन्य के खिलाफ आयकर विभाग ने 11 मई 2022 को याचिका दायर की।
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ईडी ने 18 नवंबर 2022 को PMLA एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
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चार्जशीट में 2017 से 2019 तक आबकारी विभाग में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनवर ढेबर के सिंडिकेट द्वारा 3200 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया गया।
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इस मामले में कवासी लखमा समेत 21 अन्य आरोपी हैं, जिनमें अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा, त्रिलोक सिंह ढिल्लों और कई कंपनियों के नाम शामिल हैं।
जेल में बंद लखमा:
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21 जनवरी से जेल में हैं।
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पिछली सुनवाई में सुरक्षा की कमी के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई।











