निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर का प्रभाव अब भारत के राज्यों में भी दिखाई देने लगा है। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की मांग में तेज उछाल दर्ज किया गया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज संकट का असर
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से गुजरने वाले जहाजों पर शर्तें लगाए जाने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस मार्ग से दुनिया का बड़ा हिस्सा, लगभग 40% कच्चा तेल, विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत भी इससे प्रभावित देशों में शामिल है।
डेढ़ महीने में 3000 से ज्यादा EV की बिक्री
राज्य में पिछले डेढ़ महीने के भीतर 3000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई है। इसमें लगभग 1700 दोपहिया, 700 तीन पहिया और 500 चारपहिया वाहन शामिल हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा करीब 1700-1800 के आसपास रहता था, जिससे स्पष्ट है कि EV की मांग लगभग दोगुनी हो गई है।
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ईंधन महंगा, EV बना बेहतर विकल्प
निजी कंपनियों जैसे Nayara और Shell India द्वारा पेट्रोल-डीजल के दामों में करीब 25 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी के बाद लोगों का रुझान तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ा है। कम खर्च और किफायती संचालन के कारण EV आम लोगों के लिए बेहतर विकल्प बन रहे हैं।
ई-रिक्शा की बढ़ी लोकप्रियता
इलेक्ट्रिक वाहनों में खासकर ई-रिक्शा की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2025-26 में ई-रिक्शा की बिक्री 50,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो इस क्षेत्र में बढ़ते ट्रेंड को दर्शाता है।
सरकार की सब्सिडी से मिल रहा प्रोत्साहन
छत्तीसगढ़ सरकार भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी दे रही है। राज्य सरकार द्वारा 1 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि, 20 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले वाहनों पर सब्सिडी नहीं देने का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में बढ़ेगा EV मार्केट
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार और तेजी से विस्तार करेगा।











