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CG Politics : धान खरीदी पर भूपेश बघेल का सरकार पर सवाल: मुख्यमंत्री साय को पत्र लिखकर किसानों के भविष्य पर मांगा जवाब

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CG Politics : रायपुर : धान खरीदी की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ में इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने चिंता जताई है कि धान नहीं बेच पाने वाले किसानों, खासकर ऋणी किसानों की स्थिति क्या होगी और क्या उन पर कर्ज वसूली का दबाव बनाया जाएगा।

CG Politics : भूपेश बघेल ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित समय-सीमा समाप्त हो चुकी है और सरकार लक्ष्य प्राप्ति के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर से मिल रही सूचनाएं अलग तस्वीर पेश कर रही हैं। खरीदी बंद होने के बाद बड़ी संख्या में किसान अनिश्चितता और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।

CG Politics : उन्होंने सरकार से सवाल किया कि इस वर्ष धान खरीदी का कुल लक्ष्य कितना था और उसके मुकाबले कितनी मात्रा में धान की खरीदी हुई है। साथ ही, कितने किसानों ने पंजीयन कराया, कितनों के टोकन कटे और कितने किसानों का पूरा धान खरीदा जा सका। बघेल ने यह भी जानना चाहा कि कितने किसानों के टोकन तकनीकी कारणों या समय-सीमा समाप्त होने से निरस्त हुए और कितने पंजीकृत किसान धान बेचने से वंचित रह गए।

CG Politics : पूर्व मुख्यमंत्री ने ऋणी किसानों को लेकर भी चिंता जताई और पूछा कि जिन किसानों का धान नहीं खरीदा गया, वे अपनी अल्पकालिक कृषि ऋण की अदायगी कैसे करेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अब तक खरीदे गए धान के बदले कितने किसानों को भुगतान मिल चुका है और कितनी राशि अब भी लंबित है।

CG Politics : एग्रीस्टैक पोर्टल की तकनीकी खामियों का जिक्र करते हुए बघेल ने कहा कि जिन किसानों का रकबा शून्य या कम दर्शाया गया, जिससे वे धान नहीं बेच पाए, उनकी आर्थिक क्षति का आकलन और भरपाई कैसे की जाएगी।

CG Politics : पत्र के अंत में भूपेश बघेल ने कहा कि अन्नदाता के हितों और सम्मान की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक दायित्व है। यदि प्रशासनिक कमियों के कारण कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गया है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करेगी और किसानों के हित में ठोस निर्णय लेगी, ताकि कोई भी किसान आर्थिक नुकसान या कर्ज के बोझ से परेशान न हो।

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