CG News: रायपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में हुए चर्चित मां-बेटी हत्याकांड को लेकर एक नई पहल सामने आई है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मामले में मृत्युदंड की सजा पाने वाले दोषियों को फांसी देने के लिए खुद निःशुल्क जल्लाद बनने की इच्छा जताई है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को पत्र लिखकर अपनी पेशकश रखी है।
CG News: उज्जवल दीवान ने अपने पत्र में कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू विश्वकर्मा को फांसी की सजा दिए जाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोषियों को मृत्युदंड दिया जाता है, तो वह बिना किसी पारिश्रमिक के जल्लाद की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने इस पहल के जरिए पीड़ित पुलिस परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए न्याय की मांग की है। हालांकि, मृत्युदंड पर अमल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम अधिकारियों के निर्देशों के तहत ही किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 का है। सूरजपुर में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। वारदात से पहले महिला के साथ दुष्कर्म किए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी। बाद में मां-बेटी के शव घर से करीब पांच किलोमीटर दूर फेंके गए मिले थे।
मामले की जांच के दौरान फिंगरप्रिंट, कपड़ों पर मिले खून के नमूने और डीएनए जांच जैसे साक्ष्य अहम रहे। घटना ने पूरे प्रदेश में आक्रोश पैदा कर दिया था।
तीन दोषियों को फांसी, चौथे को उम्रकैद
मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को चार आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 8 अक्टूबर 2026 को अदालत ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और चौथे दोषी को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत के फैसले के बाद अब उज्जवल दीवान ने दोषियों को फांसी देने के लिए स्वयं निःशुल्क जल्लाद बनने की पेशकश की है। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
पुलिस परिवारों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा
CG News: उज्जवल दीवान ने अपने पत्र में पुलिसकर्मियों के साथ-साथ उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान को भी महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि पुलिस परिवार के साथ गंभीर अपराध होने पर पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है। फिलहाल, उनकी इस पेशकश पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। वहीं, दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा पर अमल संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।