कवर्धा। Nishaanebaz.com-Kawardha Baiga Children Death: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के रेंगाखार वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नंदनी कुमान में पिछले चार महीनों के भीतर पांच आदिवासी बैगा बच्चों की संदिग्ध मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर घटना के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस द्वारा गठित जांच दल ने प्रभावित कुमान गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर पूरी जानकारी जुटाई।
कांग्रेस के इस जांच दल में चार विधायकों सहित 6 प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहे। इनमें मोहला-मानपुर विधायक इंदर साव मांडवी, भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मनोज मांडवी, बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव, डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल और पूर्व विधायक ममता चंद्राकर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। गांव का दौरा करने और स्थानीय ग्रामीणों से बात करने के बाद कांग्रेस नेताओं ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए और स्थिति के लिए सरकारी सिस्टम की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया।
जांच के दौरान कांग्रेस विधायकों ने मीडिया से बात करते हुए सीधा आरोप लगाया कि पांचों मासूम बच्चों की मौत गंभीर कुपोषण और समय पर सही चिकित्सीय इलाज न मिलने के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि विशेष संरक्षित बैगा आदिवासी परिवारों तक शासन की जनकल्याणकारी और पोषण योजनाओं का लाभ धरातल पर नहीं पहुंच पा रहा है। यदि वनांचल क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त होतीं और योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर किया गया होता, तो इन मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बताते हुए घोषणा की है कि वे इस रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर राष्ट्रपति और राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। उल्लेखनीय है कि गांव में मौतों के सिलसिले के साथ ही करीब 16 अन्य बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में भर्ती कराया गया है। जहां ग्रामीण किसी अज्ञात बीमारी की आशंका जता रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
Read More : NCB & FDA Joint Action: नशीली दवाओं के अवैध दुरुपयोग पर रोक के लिए बड़ी कार्रवाई, 4 को नोटिस जारी
कुमान गांव में हुई इन मौतों के बाद पूरे जिले में खलबली मच गई है और प्रशासन द्वारा गांव में मेडिकल टीम भेजकर शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। अब देखना होगा कि जांच और चिकित्सीय रिपोर्ट आने के बाद बच्चों की मौत का मुख्य कारण क्या सामने आता है और शासन-प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।