CBSE में बड़ा बदलाव : 10वीं-12वीं की कॉपियों की होगी डिजिटल जांच, 9वीं में ओपन-बुक परीक्षा की तैयारी

CBSE : नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। अब 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डिजिटल तरीके से (Onscreen Marking System) किया जाएगा। इसके साथ ही, बोर्ड ने 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9वीं में ‘ओपन-बुक’ परीक्षा शुरू करने का भी फैसला किया है।

इन दोनों बदलावों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक तेज, सटीक और पारदर्शी बनाना है। इसके अलावा, ओपन-बुक परीक्षा से छात्रों की रटने की आदत कम होगी और उनकी विश्लेषण क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

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यह नई प्रणाली तकनीक का इस्तेमाल करके मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देगी।

  • स्कैनिंग और क्यूआर कोड: सभी उत्तर पुस्तिकाओं को पहले हाई-स्पीड स्कैनर से स्कैन किया जाएगा। हर कॉपी पर एक यूनिक क्यूआर कोड होगा, जिससे परीक्षकों के लिए छात्र की पहचान छिपी रहेगी, और मूल्यांकन पूरी तरह निष्पक्ष होगा।
  • ऑनलाइन एक्सेस: परीक्षक किसी भी लोकेशन से अपने लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके कॉपियों की जांच कर सकेंगे।
  • मानकीकृत मूल्यांकन: सिस्टम में पहले से ही मॉडल उत्तर और मार्किंग गाइडलाइन उपलब्ध होगी, जिससे सभी परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन एक समान मानकों पर किया जा सकेगा।
  • रिव्यू और भुगतान: मॉडरेटर द्वारा जांची गई कॉपियों का रिव्यू किया जाएगा ताकि मूल्यांकन की गुणवत्ता बनी रहे। परीक्षकों का पारिश्रमिक भी जांची गई कॉपियों के आधार पर स्वचालित रूप से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

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‘ओपन-बुक’ परीक्षा का उद्देश्य

2026-27 से लागू होने वाली ‘ओपन-बुक’ परीक्षा गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों में शुरू की जाएगी। इस परीक्षा में छात्र किताबों और नोट्स का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिससे उनकी रटने की आदत कम होगी। यह नई पद्धति छात्रों की समझ और विश्लेषण क्षमता को परखेगी, जो नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप है।

डिजिटल मूल्यांकन के फायदे

इस नई व्यवस्था से कई फायदे होंगे:

  • तेजी और सटीकता: मूल्यांकन में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा और गलतियों की संभावना भी खत्म हो जाएगी।
  • पारदर्शिता: छात्र की पहचान गोपनीय रहने से किसी भी तरह के पक्षपात की गुंजाइश नहीं रहेगी।
  • सुरक्षा: कॉपियों के गुम होने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा नहीं रहेगा, क्योंकि सभी रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे।
  • छात्रों को लाभ: छात्र अपनी स्कैन की गई कॉपियां ऑनलाइन देख सकेंगे और रिवैल्यूएशन के लिए आसानी से आवेदन कर सकेंगे। इससे रिजल्ट जल्दी आएगा, जिससे कॉलेज एडमिशन और करियर प्लानिंग में मदद मिलेगी।

CBSE ने इस परियोजना के लिए 28 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और इसे सभी विषयों में लागू करने से पहले पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है, जिसे भविष्य में अन्य बोर्ड भी अपना सकते हैं।

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