Caste Enumeration India 2026 : नई दिल्ली (05 मार्च 2026): भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को ‘जनगणना 2027’ की रूपरेखा पेश की। गृह मंत्री ने महिला प्रगणक का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘प्रगति’ और पुरुष प्रगणक के रूप में ‘विकास’ नाम के दो शुभंकरों का अनावरण किया। ये मस्कट न केवल जनगणना के संदेश को आम जनता तक सहजता से पहुँचाएंगे, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में स्त्री-पुरुष की समान भागीदारी को भी दर्शाएंगे।
पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया जनगणना 2027 देश की पहली ऐसी जनगणना होगी जो पूरी तरह डिजिटल उपकरणों पर आधारित होगी। इसके लिए सी-डैक (C-DAC) ने चार प्रमुख डिजिटल टूल विकसित किए हैं:
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हाउसलिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर: सैटेलाइट इमेजरी के जरिए डिजिटल मैप तैयार करना।
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सुरक्षित मोबाइल ऐप: प्रगणकों के लिए डेटा अपलोड करने हेतु एक ऑफलाइन-सक्षम ऐप, जो 16 भाषाओं में काम करेगा।
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सेल्फ-एन्युमरेशन पोर्टल: नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन जमा कर सकेंगे।
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CMMS पोर्टल: पूरी प्रक्रिया की रियल-टाइम निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड।
दो चरणों में होगी जनगणना गृह मंत्रालय के अनुसार, इस बार की जनगणना में जाति आधारित गणना भी शामिल होगी। यह प्रक्रिया दो मुख्य चरणों में पूरी होगी:
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पहला चरण (1 अप्रैल 2026 से): इसमें मकानों की सूची तैयार की जाएगी और घरों की स्थिति, संपत्तियों और सुविधाओं का डेटा जुटाया जाएगा।
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दूसरा चरण (1 फरवरी 2027 से): इसमें प्रत्येक व्यक्ति का जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विवरण एकत्र किया जाएगा। पूरी कवायद 1 मार्च 2027 तक संपन्न होने की उम्मीद है।
30 लाख से अधिक अधिकारी संभालेंगे मोर्चा इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक प्रगणक, सुपरवाइजर और अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा गया है। केवल पंजीकृत मोबाइल नंबरों और CMMS पोर्टल पर अधिकृत अधिकारियों के माध्यम से ही डेटा ट्रांसमिशन संभव होगा। यह तकनीकी बदलाव न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि डेटा की सटीकता को भी कई गुना बढ़ा देगा।











