नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-World Bank GDP Forecast: दुनियाभर में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के लिए एक बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। वैश्विक वित्तीय संस्था वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर मजबूत भरोसा जताते हुए कारोबारी साल 2026-27 के लिए जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।
50 बेसिस पॉइंट की की गई बढ़ोतरी
अक्टूबर महीने में जारी वर्ल्ड बैंक की ‘साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट’ रिपोर्ट के मुताबिक, संस्था ने अपने पिछले अनुमान में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। वर्ल्ड बैंक को यह भी उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2028 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.2% की रफ्तार से आगे बढ़ेगी, जबकि वित्त वर्ष 2026 में भारत की ग्रोथ रेट 7.8% दर्ज की गई थी, जो पहले के अनुमानों से काफी बेहतर है। भारतीय अर्थव्यवस्था की इस तेज रफ्तार के पीछे घरेलू मांग में मजबूती और इंडस्ट्री तथा सर्विस सेक्टर का लगातार आगे बढ़ना मुख्य कारण है।
इन दो मोर्चों पर बनी हुई है चिंता
भले ही जीडीपी के आंकड़े उत्साहजनक हों, लेकिन रिपोर्ट में कुछ मोर्चों पर जोखिम की चेतावनी भी दी गई है:
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कृषि क्षेत्र में कमजोरी: जुलाई के बाद देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश में कमी आई है। इसके अलावा अल नीनो (El Nino) के प्रभाव से फसलों के उत्पादन पर बुरा असर पड़ने की आशंका है। अगर स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर ग्रामीण इलाकों की कमाई और खर्च करने की क्षमता पर पड़ेगा।
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महंगे कच्चे तेल का खतरा: वैश्विक तनाव के चलते क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए आयात बिल बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो सकता है, जिससे रोजमर्रा की वस्तुएं और सब्जियां भी महंगी होने की आशंका है।
AI अपनाने पर वर्ल्ड बैंक का जोर
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण एशिया में उत्पादकता और रोजगार बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। भारत के लिए यह प्रोडक्टिविटी बढ़ाने का अहम जरिया बन सकता है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक भारत अभी इस मामले में पीछे है। वर्ल्ड बैंक के सर्वे के अनुसार, भारत में केवल 3.4% कंपनियां किसी न किसी रूप में AI का इस्तेमाल करती हैं, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 42.7% है। भारत में एआई अपनाने की लागत ऊंची होने के कारण सिर्फ 3.5% कंपनियों ने ही एआई सॉफ्टवेयर या सब्सक्रिप्शन के लिए भुगतान किया है, जबकि अमेरिका में यह आंकड़ा 23.1% है।






