रीवा। Nishaanebaz.com-Rewa Collector Office Plea: मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। रीवा के गुढ़ थाना क्षेत्र की एक पीड़ित महिला ने पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली से तंग आकर अब सीधे जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। महिला का आरोप है कि उसके कैंसर पीड़ित पति को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है और परिवार के लोगों ने उन्हें घर से बेघर कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने अपने ही परिवार के कुछ लोगों पर मारपीट, गंभीर प्रताड़ना और घर से बाहर निकालने का करारा आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उसने इस मामले की शिकायत सबसे पहले स्थानीय गुढ़ थाने में की थी, और जब वहां कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने रीवा एसपी कार्यालय (SP Office) में भी लिखित आवेदन दिया। हालांकि, लंबे समय तक कहीं से भी न्याय न मिलने पर महिला का प्रशासनिक व्यवस्था से भरोसा उठ गया।
कैंसर पीड़ित पति पर लगाए जा रहे झूठे आरोप
पीड़ित महिला ने बताया कि उनके पति गंभीर बीमारी (कैंसर) से पीड़ित हैं और बीमारी के चलते चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं। इसके बावजूद परिवार के अन्य लोग उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। महिला के मुताबिक, परिवार के लोग उनके बीमार पति पर शराब पीने के झूठे आरोप लगाते हैं, जबकि हकीकत यह है कि वह बिस्तर पर मौत और बीमारी से जंग लड़ रहे हैं।
रीवा में कैंसर पीड़ित पति के साथ प्रताड़ना का आरोप लगाकर महिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची। महिला ने पुलिस पर सुनवाई नहीं करने का आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई।
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— News (@khalkho_ji) October 6, 2026
सामान के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची महिला
लगातार मिल रही प्रताड़ना और पुलिसिया स्तर पर न्याय न मिलने से परेशान होकर महिला आखिरकार अपने बीमार पति और घर का जरूरी सामान लेकर सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुंची। महिला ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब उनके पास रहने के लिए कोई छत या सुरक्षित जगह नहीं बची है, इसलिए वह यहीं कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठने को मजबूर हैं। अब इस पीड़ित परिवार को देश और प्रशासन के मुखिया यानी कलेक्टर से ही मदद की एकमात्र उम्मीद बची है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद पीड़ित परिवार को न्याय और रहने के लिए राहत मिल पाती है या नहीं।






