सागर। Nishaanebaz.com-Cheetah Return to Sagar: मध्य प्रदेश के सागर जिले से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। राज्य के सागर जिले में स्थित वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में करीब 100 साल बाद एक बार फिर चीतों की वापसी होने जा रही है। वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह के समापन अवसर पर 7 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो नेशनल पार्क से लाए जा रहे दो चीतों को खुले जंगल में बसाने की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही सागर का यह रिजर्व मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा नया ठिकाना बन जाएगा।
कूनो के बाद अब सागर बना चीतों का नया आशियाना
‘प्रोजेक्ट चीता’ के पहले चरण में नामीबिया से 8 चीते लाए गए थे, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान (श्योपुर) में छोड़ा था। इसके बाद दूसरे चरण (फरवरी 2023) में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो लाए गए थे।
अब इस कड़ी में सागर का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा नया ठिकाना बनने जा रहा है। यहां कूनो नेशनल पार्क से नर चीता ‘थोलो’ और मादा चीता ‘CCB-3’ को लाया जा रहा है। चीता स्टीयरिंग कमेटी ने इस रिजर्व में कुल चार चीतों को बसाने की अनुमति दी है।
पहले क्वारेंटीन बाड़े में रखे जाएंगे चीते
कूनो से लाए जाने वाले इन दोनों चीतों को सीधे खुले जंगल में नहीं छोड़ा जाएगा। सुरक्षा और अनुकूलन (Adaptation) को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले इन्हें मुहली रेंज में बनाए गए विशेष क्वारेंटीन बाड़े में रखा जाएगा। इसके बाद इन्हें सॉफ्ट रिलीज बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञ उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण के साथ तालमेल बिठाने की लगातार निगरानी करेंगे। परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल रहने पर ही इन्हें बड़े इलाके और अंततः खुले जंगल में छोड़ा जाएगा।
बाघ और तेंदुओं के साथ सह-अस्तित्व की होगी चुनौती
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीता पुनर्स्थापना की सबसे बड़ी खासियत और रोमांचक पहलू यह है कि यहां पहले से ही बाघ और तेंदुए मौजूद हैं। खुले जंगल में चीतों के आने के बाद उनका सामना इन अन्य शिकारी प्रजातियों से होगा। ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, सागर और आसपास के नौरादेही क्षेत्र के जंगलों में करीब एक सदी पहले चीते बहुतायत में पाए जाते थे, और उस दौरान भी इस क्षेत्र में बाघ व तेंदुए मौजूद थे। समय के साथ देश से चीते विलुप्त हो गए थे, लेकिन अब एक बार फिर इस क्षेत्र में उनकी ऐतिहासिक वापसी से पर्यावरण प्रेमियों में भारी उत्साह है।






