Wednesday, August 19, 2026
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Burhanpur News: पांगरी बांध प्रभावित किसानों का बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन, उचित मुआवजे की उठी मांग, नदी में अर्ध जलमग्न होकर किया प्रदर्शन

Burhanpur News
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Burhanpur News: बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध के प्रभावित किसानों ने आज बड़ा आंदोलन किया। खकनार तहसील के पांगरी, नागझिरी और बसाली गांवों के सैकड़ों किसानों ने उतावली नदी में अर्ध जलमग्न होकर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया और सरकार से न्यायपूर्ण मुआवजे की मांग की। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून के मुताबिक उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए, जो उनका अधिकार है।

Burhanpur News: बुरहानपुर जिले के पांगरी बांध निर्माण से प्रभावित करीब डेढ़ हजार किसानों ने आज अर्ध जलमग्न आंदोलन कर सरकार को चेताया कि वे भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार अपने मुआवजा अधिकार से पीछे नहीं हटेंगे।
कुल 287 हेक्टेयर भूमि डुब क्षेत्र में जा रही है, जो पांगरी, नागझिरी और बसाली गांवों के किसानों की आजीविका का आधार है। यह क्षेत्र बुरहानपुर का सबसे बड़ा बांध परियोजना क्षेत्र माना जा रहा है, जिसकी सिंचाई क्षमता 4,400 हेक्टेयर है।

किसानों ने मांग की कि यदि सरकार अधिग्रहण को एक गुना दर पर तय करती है तो मूल्यांकन शहरी दरों के आधार पर हो, और यदि शहर के अनुसार मूल्यांकन नहीं किया जाता तो ग्रामीण क्षेत्र के लिए दो गुना मुआवजा देने का कानूनी प्रावधान लागू किया जाए।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि किसानों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर कर गरीब, आदिवासी और किसानों का शोषण किया जा रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से किसानों द्वारा किए जा रहे निवेदन और आंदोलनों को लगातार अनसुना किया गया है।

डॉ. पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरण प्रभाव आकलन नहीं किया गया, जबकि बांध निर्माण के लिए यह अनिवार्य होता है। हजारों पौधे, वनस्पतियां, औषधीय प्रजातियां और संवेदनशील पेड़ जैसे—मदनफल, शिवलिंगी, नागबला, अर्जुन, शिशम, हरड़, बेहड़ा—डुब क्षेत्र में नष्ट होने की कगार पर हैं, लेकिन इनके संरक्षण या पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई गई।

 

Burhanpur News: फिलहाल किसान अपने अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण सत्याग्रह पर अड़े हुए हैं और चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द न्यायसंगत मुआवजा और पर्यावरण को लेकर आवश्यक प्रक्रिया का पालन करे। देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है।

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