बुरहानपुर : मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी बुरहानपुर एक बार फिर अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा को लेकर चर्चा में है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर यहां पतंगबाजी सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि आस्था का प्रतीक बन जाती है। बुरहानपुर के प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में भगवान श्री स्वामीनारायण और लक्ष्मी नारायण देव को विधिवत रूप से पतंग उड़ाते हुए देखा गया।
स्वामीनारायण मंदिर में जीवंत हुई सदियों पुरानी परंपरा
मकर संक्रांति के दिन मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान को पतंग अर्पित की जाती है। मान्यता है कि भगवान द्वारा पतंग उड़ाना सुख, शांति और समृद्धि का संकेत माना जाता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और हर वर्ष श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनती है।
‘अभ्युदय मध्य प्रदेश’ का संदेश आसमान तक
इस वर्ष पतंगों पर लिखा संदेश — “अभ्युदय मध्य प्रदेश” — प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य, विकास और उन्नति का प्रतीक बनकर सामने आया। रंग-बिरंगी पतंगों के साथ यह संदेश आसमान में उड़ता देख श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, जयघोष और भक्ति संगीत से गूंज उठा।
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दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए आसपास ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुरहानपुर पहुंचे। भक्तों का कहना है कि जब भगवान स्वयं पतंग उड़ाते हैं, तो प्रदेश और समाज के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम
बुरहानपुर की यह अनोखी परंपरा न केवल धार्मिक विश्वास को सशक्त करती है, बल्कि मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देती है।











