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Bilaspur High Court : हवाई सुविधा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला….

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Bilaspur High Court : बिलासपुर | बिलासपुर में हवाई सुविधा के विस्तार से संबंधित दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की पहल का बड़ा असर देखने को मिला है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान, रक्षा मंत्रालय ने एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक 290 एकड़ जमीन की कीमत ₹71 करोड़ से घटाकर ₹46 करोड़ करने पर सहमति दे दी है।

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Bilaspur High Court : जमीन हस्तांतरण की बाधा हुई दूर

पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने केंद्रीय रक्षा सचिव और राज्य के मुख्य सचिव को मूल्यांकन की बाधा को सुलझाने का निर्देश दिया था। रक्षा मंत्रालय की ओर से दाखिल शपथ पत्र में सैन्य अधिकारी ने बताया कि 9 सितंबर को हुई उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ सरकार की मांग स्वीकार कर ली गई। आज सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने बताया कि रक्षा मंत्रालय ने ₹71 करोड़ की मांग को अब घटाकर ₹46 करोड़ करने का निर्णय लिया है। यह नया रेट जमीन अधिग्रहण में खर्च हुई राशि और 2014 से आज तक के ब्याज के आधार पर तय किया गया है। अब राज्य सरकार को यह राशि जमा करनी होगी, जिसके बाद 290 एकड़ जमीन एयरपोर्ट रनवे और अन्य विस्तार के लिए हस्तांतरित कर दी जाएगी।

नाइट लैंडिंग और उड़ान कटौती पर हाईकोर्ट सख्त

राज्य के नवनियुक्त मुख्य सचिव विकासशील ने अपने शपथ पत्र में नाइट लैंडिंग हेतु डीवीओआर मशीन स्थापना संबंधी सभी कार्य पूरे होने और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा निरीक्षण किए जाने की जानकारी दी।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव और सुदीप श्रीवास्तव ने सवाल उठाया कि नाइट लैंडिंग लाइसेंस के लिए आवेदन और डीजीसीए निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य अभी भी लंबित हैं, जिस पर मुख्य सचिव के शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं है।

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इसके अलावा, याचिकर्ताओं ने विमानन कंपनी अलायंस एयर द्वारा 26 अक्टूबर से सप्ताह में तीन दिन उड़ानें बंद करने और दिल्ली की उड़ान को भी 6 दिन से घटाकर 3 दिन करने के एकतरफा फैसले पर भी आपत्ति जताई। अधिवक्ताओं ने कहा कि यह फैसला 13 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट में दिए गए उस आश्वासन के खिलाफ है, जिसमें कंपनी ने सप्ताह के सातों दिन उड़ानें जारी रखने की बात कही थी।

खंडपीठ ने इन सभी गंभीर विषयों को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव और अलायंस एयर दोनों को अगली सुनवाई तक नया शपथ पत्र दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर को होगी।

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