Barwani Collector Office News : बड़वानी। जिला कलेक्टर कार्यालय में सुरक्षा की दृष्टि से प्रवेश के लिए हेलमेट अनिवार्य करने का सरकारी आदेश पहले ही दिन विवादों में घिर गया। मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान प्रशासन की इस सख्ती का मिला-जुला और कहीं-कहीं पक्षपाती असर देखने को मिला। आलम यह रहा कि नियमों के फेर में पड़कर जहाँ कई ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर भीतर नहीं पहुँच पाए, वहीं कार्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा।
जनता बनाम अधिकारी: नियमों में अंतर क्यों? जनसुनवाई के दौरान मुख्य द्वार पर एक पुलिसकर्मी की तैनाती की गई थी ताकि बिना हेलमेट किसी भी दोपहिया वाहन को प्रवेश न मिले। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। धनोरा निवासी आशीष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि, “नियम सभी के लिए समान होने चाहिए। आम जनता को गेट पर रोका जा रहा है, जबकि कई रसूखदार और विभाग के अधिकारी बिना हेलमेट के ही परिसर के भीतर घूमते नजर आए।”
मिसाल और मजबूरी का नजारा इस सख्ती के बीच कुछ सकारात्मक और कुछ विवश करने वाली तस्वीरें भी सामने आईं। प्रोफेसर आर.एस. मुजाल्दे जब बिना हेलमेट के कार्यालय पहुँचे, तो उन्होंने आदेश का सम्मान करते हुए अपनी बाइक गेट के बाहर ही खड़ी की और पैदल चलकर परिसर में प्रवेश किया। उनकी यह सादगी चर्चा का विषय रही। दूसरी ओर, कड़ाई के कारण जनसुनवाई में आने वाले लोगों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, जिससे कार्यालय सूना नजर आया।
जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर सवाल बड़वानी के दूर-दराज क्षेत्रों से अपनी शिकायतें लेकर आने वाले ग्रामीणों के लिए यह नियम एक नई मुसीबत बनकर उभरा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या हेलमेट की अनिवार्यता जनहित के मुद्दों से बड़ी हो गई है? एक अकेले पुलिसकर्मी के लिए सैकड़ों लोगों को नियमों का पाठ पढ़ाना और समान रूप से कड़ाई करना असंभव नजर आया। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस आदेश में कुछ ढील देता है या अधिकारियों के लिए भी सख्ती के समान निर्देश जारी किए जाते हैं।












