बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सड़क पर खुले में घूमते और बैठे आवारा मवेशियों के कारण हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन और शासन की ओर से कई बार सख्त आदेश जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा।
इसी लापरवाही का ताजा उदाहरण शुक्रवार को बालोद मुख्यालय में राष्ट्रीय राजमार्ग-930 पर सामने आया। आमापारा स्थित शिवनाथ कॉम्प्लेक्स के पास सड़क पर बैठे मवेशियों को बचाने के प्रयास में स्कॉर्पियो पलट गई। हादसे में मौके पर ही एक वृद्ध महिला की मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों का जिला अस्पताल बालोद में इलाज चल रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन दल्लीराजहरा से आ रही थी और सवार सभी लोग अपने गांव अरौद लौट रहे थे। अचानक सड़क पर बैठे मवेशियों ने रास्ता रोक दिया। चालक ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन वाहन संतुलन खोकर पलट गया।
बालोद जिले के लगभग सभी प्रमुख मार्गों पर मवेशियों की ऐसी स्थितियां आम हो गई हैं। खुले में घूमते मवेशी सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। प्रशासन की ओर से बार-बार कार्रवाई और अभियान चलाने के दावे किए गए, लेकिन नतीजे नाकाफी रहे। न मवेशियों को स्थायी रूप से सड़क से हटाया गया और न ही उनके मालिकों पर कोई कड़ा दंडात्मक कदम उठाया गया।
स्थानीय लोग कहते हैं कि प्रशासन केवल कागजी आदेशों तक सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी अब भी गंभीरता नहीं दिखाते, तो आने वाले दिनों में और भी भयावह हादसे हो सकते हैं। सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी हर किसी की जिंदगी को खतरे में डाल रही है।
बालोद की यह घटना स्पष्ट कर देती है कि अब जिम्मेदार अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करते हुए मवेशियों को नियमित रूप से सड़क से हटाना और उनके मालिकों पर जुर्माना लगाना जरूरी है, तभी ऐसे हादसों पर लगाम लग सकती है।











