Balod News : बालोद/ के पी चंद्राकर) : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले का तांदुला जलाशय, जो कभी इस क्षेत्र की जीवनरेखा और प्राकृतिक धरोहर माना जाता था, आज गंभीर संकट से गुजर रहा है। अवैध निर्माण, प्रदूषण और भ्रष्टाचार ने इसकी शुद्धता और उपयोगिता को खतरे में डाल दिया है। यह जलाशय न केवल शहर की पेयजल आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है, बल्कि हजारों किसानों की खेती को हरा-भरा रखने का आधार भी है। तथाकथित ईको-फ्रेंडली रिसॉर्ट से निकलने वाला दूषित पानी सीधे जलाशय में मिल रहा है और वेटलैंड क्षेत्र में अवैध निर्माण ने पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को खतरे में डाल दिया है।
Balod News : तांदुला जलाशय का निर्माण मूल रूप से कृषि सिंचाई और जन-उपयोग के लिए किया गया था। इसका वेटलैंड क्षेत्र पक्षियों, मछलियों और अन्य जलीय प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है और यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। दशकों से यह जलाशय बालोद की हरियाली और समृद्धि का प्रतीक रहा है। लेकिन आज यह स्थिति बदल चुकी है। रिसॉर्ट से निकलने वाला गंदा पानी न केवल पेयजल की गुणवत्ता को खराब कर रहा है बल्कि सिंचाई के लिए जाने वाले पानी को भी विषैला बना रहा है।
Balod News : स्थानीय समुदाय का आरोप है कि नियमों की अवहेलना करते हुए वेटलैंड क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया। निर्माण से पहले मुरुम की खुदाई कर क्षेत्र की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुँचाया गया। स्थानीय अधिकारियों, कुछ जनप्रतिनिधियों और पोर्टल संचालकों पर मिलीभगत व वसूली के आरोप लगे हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण विभाग के स्पष्ट नियमों के बावजूद यह निर्माण प्रशासनिक विफलता और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है।
Balod News : किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं। उनका कहना है कि तांदुला जलाशय उनकी खेती का आधार है और दूषित पानी खेतों तक पहुँचकर उत्पादन घटा रहा है। भविष्य में हर मौसम में पानी की किल्लत का खतरा है। किसानों की आजीविका को निजी व्यावसायिक हितों के लिए दांव पर लगाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीण और पर्यावरण प्रेमी लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन उनकी आवाज को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं। यह सामाजिक अन्याय का स्पष्ट उदाहरण है।
Balod News : पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति पर नियंत्रण नहीं हुआ तो जलाशय की जैव-विविधता पूरी तरह नष्ट हो सकती है। पेयजल और सिंचाई का पानी दूषित होकर मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा बनेगा, फसल उत्पादन घटेगा और क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा तथा अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

Balod News : किसान और स्थानीय समुदाय प्रशासन और सरकार से मांग करते हैं कि वेटलैंड क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा रिसॉर्ट संचालकों पर सख्त कार्रवाई की जाए। रिसॉर्ट से निकलने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए कठोर नियम लागू हों और जलाशय की नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए। जलाशय संरक्षण की प्रक्रिया में किसानों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

Balod News : तांदुला जलाशय केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि बालोद की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर है। इसे बचाना न केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी है बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ेगा। सर्व आदिवासी समाज, किसान संगठन और स्थानीय समुदाय प्रशासन और सरकार से आग्रह करता है कि तुरंत कार्रवाई करते हुए तांदुला जलाशय की शुद्धता और अस्तित्व को बचाया जाए.













