Abhanpur Sawmill: अभनपुर। छत्तीसगढ़ के अभनपुर स्थित हुकुमचंद-वामनचंद शाह आरा मिल में संदिग्ध सरई (साल) लकड़ी की बरामदगी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वन विभाग की टीम ने दूसरे दिन भी कार्रवाई जारी रखते हुए बड़ी मात्रा में लकड़ी के गोलों की जांच की और कई संदिग्ध लकड़ियों को जब्त कर लिया। विभाग ने आरा मिल को सील कर दिया है और लकड़ी से जुड़े दस्तावेजों, ट्रांजिट परमिट (टीपी) तथा स्टॉक रजिस्टर की बारीकी से जांच की जा रही है।
हालांकि कार्रवाई के बीच अब पूरे मामले की जांच की निष्पक्षता को लेकर भी कई सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की गई, तो केवल अवैध लकड़ी का मामला ही नहीं बल्कि उससे जुड़े पूरे नेटवर्क और कथित संरक्षण का भी खुलासा हो सकता है।
दूसरे दिन भी चला जांच अभियान, आरा मिल रही सील
वन विभाग की टीम लगातार दूसरे दिन भी आरा मिल परिसर में मौजूद रही। अधिकारियों ने लकड़ी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया, लकड़ियों की प्रजाति, संख्या और दस्तावेजों का मिलान किया। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में संदिग्ध सरई (साल) लकड़ी के गोले जब्त किए गए हैं।
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जांच पूरी होने तक संबंधित आरा मिल को सील कर दिया गया है, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके। विभागीय अधिकारी जब्त लकड़ी के स्रोत और उसके परिवहन की पूरी श्रृंखला की जांच कर रहे हैं।
बिना ट्रांजिट परमिट लकड़ी पहुंचने की चर्चा
Abhanpur Sawmill: मामले में अब कई नए दावे भी सामने आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि संदिग्ध लकड़ी बिना वैध ट्रांजिट परमिट (टीपी) के रायपुर वनमंडल क्षेत्र से अभनपुर तक लाई गई हो सकती है।यदि जांच में इस तरह के तथ्य सामने आते हैं, तो यह मामला केवल अवैध लकड़ी परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई स्तरों पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और वन विभाग ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
प्रभावशाली अधिकारियों के संरक्षण की चर्चा
Abhanpur Sawmill: मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के संरक्षण में अवैध गतिविधियां संचालित होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हो सकता है।
वहीं कुछ लोगों का यह भी दावा है कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावित करने या उन्हें बचाने की कोशिशें भी हो सकती हैं। हालांकि इन आरोपों की भी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमनेर गांव में लकड़ी छिपाने का दावा
Abhanpur Sawmill: जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण दावा सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक संदिग्ध लकड़ी का कुछ हिस्सा अभनपुर से लगे अमनेर गांव में छिपाकर रखा गया है।यदि इस सूचना की पुष्टि होती है तो वन विभाग वहां भी तलाशी अभियान चला सकता है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जब्त की गई लकड़ी के अलावा कहीं और भी अवैध रूप से लकड़ी का भंडारण किया गया था या नहीं।
सीसीटीवी फुटेज से खुल सकते हैं कई राज
मामले में यह दावा भी किया जा रहा है कि जुलाई महीने के दौरान अभनपुर परिक्षेत्र के तत्कालीन डिप्टी रेंजर का संबंधित आरा मिल में लगातार आना-जाना था।स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि मिल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जाए तो पूरे घटनाक्रम की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित अधिकारियों और मिल संचालकों के बीच किस प्रकार का संपर्क था।हालांकि यह दावा भी फिलहाल जांच का विषय है और इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वन विभाग की चुप्पी, आधिकारिक बयान का इंतजार
Abhanpur Sawmill: कार्रवाई के बावजूद वन विभाग ने अभी तक केवल जब्ती और जांच की प्रक्रिया की पुष्टि की है। कथित संरक्षण, अधिकारियों की भूमिका या अन्य आरोपों पर विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष, वैज्ञानिक और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जाती है, तो अवैध लकड़ी के स्रोत, परिवहन, दस्तावेजी अनियमितताओं और पूरे नेटवर्क का खुलासा संभव है।
पूरे मामले पर टिकी हैं सबकी नजर
Abhanpur Sawmill: अभनपुर आरा मिल का यह मामला अब केवल संदिग्ध लकड़ी की बरामदगी तक सीमित नहीं रह गया है। कार्रवाई के दूसरे दिन सामने आए विभिन्न दावों और चर्चाओं ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।अब सभी की नजर वन विभाग की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ती है, तो इस मामले में जुड़े प्रत्येक पहलू—अवैध लकड़ी के स्रोत, परिवहन, संभावित संरक्षण और जिम्मेदार लोगों की भूमिका—से पर्दा उठ सकता है।फिलहाल वन विभाग की कार्रवाई जारी है और पूरे मामले में आगे होने वाले खुलासों का इंतजार किया जा रहा है।






