नई दिल्ली: आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर बदलने की सुविधा अब घर बैठे उपलब्ध हो गई है। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने अपने नए AADHAAR एप में यह सर्विस लॉन्च कर दी है। इसके साथ ही नाम, पता और ईमेल अपडेट करने की सुविधा भी जल्द शुरू की जाएगी।
नए अपडेट की खास बात यह है कि यूजर्स को किसी डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं होगी, न ही आधार सेंटर जाने का झंझट रहेगा। सिर्फ OTP वेरिफिकेशन और फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से मोबाइल नंबर बदला जा सकेगा। यह सुविधा दूरदराज के क्षेत्रों, वरिष्ठ नागरिकों और अक्सर एक शहर से दूसरे शहर में जाने वालों के लिए बेहद उपयोगी होगी।
नई डिजिटल सर्विस कैसे काम करेगी?
UIDAI के अनुसार, मोबाइल नंबर अपडेट की प्रक्रिया बेहद सरल है और कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती है। इसके लिए:
- AADHAAR एप डाउनलोड कर लॉगिन करें
- आधार नंबर डालें → OTP वेरिफाई करें
- एक 6-डिजिट लॉगिन PIN सेट करें
- ‘My Aadhaar Update’ सेक्शन में जाएं
- ‘Mobile Number Update’ चुनें
- पुराना नंबर वेरिफाई करें → नया नंबर डालकर OTP कन्फर्म करें
- फेस ऑथेंटिकेशन पूरा करें
- ₹75 का शुल्क ऑनलाइन जमा करें
- इसके बाद मोबाइल नंबर अपडेट हो जाएगा।
मोबाइल नंबर अपडेट करना क्यों जरूरी है?
आधार देश की सबसे बड़ी डिजिटल ID सर्विस है, जो 130 करोड़ लोगों से जुड़ी है। लगभग हर सरकारी और प्राइवेट डिजिटल सर्विस—
- बैंकिंग,
- सब्सिडी,
- इनकम टैक्स,
- मोबाइल सिम,
- डिजिलॉकर
—सब OTP आधारित हैं। इसलिए आधार में सही मोबाइल नंबर होना बेहद जरूरी हो जाता है।
पहले मोबाइल अपडेट कराने के लिए एनरोलमेंट सेंटर जाना पड़ता था, जहां कतारें और बायोमेट्रिक प्रक्रियाएँ काफी समय लेती थीं। नई सुविधा से यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है।
नया AADHAAR एप — क्या खास है?
UIDAI ने पिछले महीने लॉन्च किया नया आधार एप, जिसमें ये फीचर्स उपलब्ध हैं:
- एक फोन में 5 आधार स्टोर कर सकेंगे
- सेलेक्टिव डेटा शेयरिंग – सिर्फ वही जानकारी साझा करें जो जरूरत हो
- फेस ऑथेंटिकेशन से सुरक्षित लॉगिन
- मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट
- ऑफलाइन मोड, इंटरनेट न होने पर भी आधार देखें
- UPI की तरह स्कैन एंड शेयर ID
पुराना mAadhaar और नया AADHAAR ऐप—क्या फर्क है?
- mAadhaar: PDF डाउनलोड, PVC कार्ड, वर्चुअल ID जैसी सर्विसेज के लिए बेहतर
- नया AADHAAR ऐप: ज्यादा सिक्योर, प्राइवेसी-फर्स्ट, सिर्फ जरूरी डेटा शेयर
UIDAI का लक्ष्य है कि आधार की सारी सुविधाएँ पूरी तरह डिजिटल और आसान हों।
आधार की यात्रा – 2009 से 2025 तक
2009 में शुरू हुआ आधार आज 130 करोड़ लोगों की पहचान बन चुका है। पेपर कार्ड से शुरू हुआ यह सिस्टम अब पूरी तरह डिजिटल हो रहा है। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में अधिकतर सरकारी और निजी सेवाएं ऑनलाइन हों और पहचान से जुड़ी सभी समस्याएँ एक ऐप में आसानी से हल हो सकें।













