Umang Singhar Letter to CM MP : भोपाल (24 मार्च 2026)। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के अन्नदाताओं की समस्याओं को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिंघार ने मुख्यमंत्री को एक औपचारिक पत्र लिखकर किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दो प्रमुख मांगें रखी हैं। उन्होंने सरकार को चुनावी वादे की याद दिलाते हुए गेहूं का समर्थन मूल्य 3000 रुपये प्रति क्विंटल करने और अल्पकालीन कृषि ऋण वसूली की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 30 अप्रैल करने का आग्रह किया है।
ऋण वसूली की तिथि पर गहराया संकट
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान में सरकारी नीतियों के कारण किसान दोहरी मार झेल रहा है।
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तारीखों का टकराव: प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी 1 अप्रैल से शुरू होती है, जबकि बैंकों में कर्ज जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित है।
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दबाव की स्थिति: फसल बिकने से पहले ही कर्ज चुकाने के दबाव के कारण किसान साहूकारों के जाल में फंस रहा है।
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डिफाल्टर होने का डर: पिछले वर्ष सरकार ने वसूली की तिथि 30 अप्रैल से घटाकर 31 मार्च कर दी थी, जिससे हजारों किसान समय पर भुगतान नहीं कर सके और ‘डिफाल्टर’ घोषित हो गए।
प्रमुख मांगें और सुझाव
उमंग सिंघार ने किसानों के हित में निम्नलिखित बिंदुओं पर त्वरित निर्णय लेने की मांग की है:
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स्थायी समाधान: ऋण वसूली की अंतिम तिथि को 31 मार्च के स्थान पर स्थायी रूप से 30 अप्रैल किया जाए ताकि किसान फसल बेचकर सम्मानजनक तरीके से कर्ज चुका सकें।
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डिफाल्टरों को राहत: जो किसान तिथि परिवर्तन के कारण डिफाल्टर हुए हैं, उन्हें विशेष छूट या कर्ज माफी देकर राहत प्रदान की जाए।
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चुनावी वादा पूरा हो: चुनाव से पहले किए गए वादे के मुताबिक गेहूं की खरीदी 3000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से शुरू की जाए।
संवेदनशीलता दिखाने की अपील
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि किसान इस समय भीषण आर्थिक दबाव में है। यदि सरकार समय रहते न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और ऋण वसूली की समय सीमा पर ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो किसानों का असंतोष बढ़ सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे केवल घोषणाएं न करें, बल्कि धरातल पर किसानों को लाभ पहुँचाने के लिए शासनादेश जारी करें।











