Forest Department Negligence : गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा (रायगढ़)। रायगढ़ जिले के वनों में वन्यजीवों की घटती संख्या और उनके अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण जंगली जानवरों की तादाद तेजी से कम हो रही है, जबकि वन अमला अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय घर बैठे वेतन लेने में व्यस्त है।
परंपरागत पद्धति छोड़ी, सेटेलाइट के भरोसे ‘अंधेरा’
एक समय था जब वनकर्मी जंगलों में जाकर फुट-ट्रेस (पैरों के निशान) के जरिए वन्यजीवों की सटीक गणना करते थे। लेकिन अब वन विभाग पूरी तरह ‘हाईटेक’ होने का दावा कर रहा है। विभाग का कहना है कि अब सेटेलाइट के जरिए हवाई सर्वेक्षण और देहरादून से गणना की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि धरातल पर काम करने वाले स्थानीय अधिकारियों के पास वन्यजीवों की सही संख्या की कोई जानकारी नहीं है। वे देहरादून से आने वाली फाइलों के भरोसे बैठे हैं, जिससे जानवरों की सुरक्षा राम भरोसे हो गई है।
गायब हो रहे हैं वन्यजीव, फाइलों में ‘गर्द’ खा रहे आंकड़े
मौजूदा स्थिति यह है कि जिला वन मंडल और गोमार्डा अभ्यारण्य (कुल 1529.596 वर्ग किमी) में वन्यजीवों की सुरक्षा का कोई ठोस तंत्र नहीं बचा है। पूर्व में हुए गणना के आंकड़ों और वर्तमान के ‘गायब होते’ जानवरों की स्थिति को देखें तो स्थिति भयावह है:
| वन्यजीव | पूर्व में दर्ज संख्या | वर्तमान स्थिति |
| जंगली हाथी | 10 | संदेहास्पद |
| भालू | 788 | घट रही संख्या |
| जंगली सूअर | 3678 | भारी कमी |
| कोटरी | 1043 | विलुप्त होने की कगार पर |
| शेर, तेंदुआ, बिल्ली, खरगोश | – | नामोनिशान गायब |
जानकारों का कहना है कि गणना के आंकड़ों में कई प्रजातियों का उल्लेख ही न होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि या तो वे प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं या विलुप्ति की कगार पर हैं।
मुख्यालय से नदारद रहता है वन अमला
रिपोर्ट के अनुसार, रायगढ़ के जंगलों में तैनात वन अधिकारी और कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालयों पर निवास नहीं करते। वे अपनी ड्यूटी को केवल एक औपचारिकता मानकर घर बैठे वेतन ले रहे हैं। वनों की सुरक्षा के लिए जो सतर्कता बरती जानी चाहिए, उसका पूरी तरह अभाव है। स्थानीय स्तर पर फील्ड में ‘गश्त’ (पेट्रोलिंग) करने के बजाय अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति करने में रुचि ले रहे हैं।
पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी
वन्यजीवों की संख्या कम होने का सीधा असर पर्यावरण और मानवीय जीवन पर पड़ रहा है। इको-सिस्टम बिगड़ने से जंगली जानवरों का रुख मानव बस्तियों की ओर बढ़ रहा है। यदि वन विभाग ने अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं किया और देहरादून से बैठकर ‘हवाई सर्वे’ करने के बजाय धरातल पर सुरक्षा तंत्र मजबूत नहीं किया, तो रायगढ़ के जंगल जल्द ही ‘जीवविहीन’ हो जाएंगे।











