निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : आदिवासी बाहुल्य बड़वानी जिला आज महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आया है। प्रशासनिक नेतृत्व से लेकर स्थानीय निकायों तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी जिले की पहचान बन चुकी है। जिले की कलेक्टर जयति सिंह, जिला पंचायत सीईओ काजल जावला और नगर पालिका अध्यक्ष अश्विनी चौहान जैसी कई महिलाएं अहम जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।
ये महिलाएं न केवल प्रशासनिक कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित कर रही हैं बल्कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी कर रही हैं।
पंचायतों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी
बड़वानी जिले में करीब 409 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से 234 पंचायतों की सरपंच महिलाएं हैं, जो अपने गांव की जिम्मेदारी संभाल रही हैं और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
एक समय ऐसा था जब पंचायतों में सरपंच का पद पुरुष प्रधान माना जाता था, लेकिन अब बदलते समय के साथ महिलाएं भी नेतृत्व की भूमिका में आगे आ रही हैं।
जनपद और नगर निकायों में भी महिलाएं आगे
जिले में सात जनपद पंचायत क्षेत्र हैं, जिनमें से पांच जनपद पंचायतों की अध्यक्ष महिलाएं हैं। इनमें बड़वानी, सेंधवा, पानसेमल, राजपुर और निवाली शामिल हैं, जबकि पाटी और ठीकरी में पुरुष अध्यक्ष हैं।
इसी तरह जिले के नौ नगरीय निकायों में से छह में महिला अध्यक्ष कार्यरत हैं। बड़वानी, सेंधवा, ठीकरी, राजपुर, पलसूद और निवाली नगर निकायों की कमान महिलाओं के हाथ में है।
प्रशासनिक पदों पर भी महिलाएं
बड़वानी जिले में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर भी महिलाएं जिम्मेदारी निभा रही हैं। इनमें कलेक्टर जयति सिंह, जिला पंचायत सीईओ काजल जावला, सीएमओ सोनाली शर्मा, सीएमएचओ डॉ. सुरेखा जमरे, जेल अधीक्षक शैफाली तिवारी, डीईओ शीला चौहान और सहायक संचालक प्रियंका रानी सहित लगभग 18 पदों पर महिलाएं कार्यरत हैं।
कलेक्टर जयति सिंह का नेतृत्व
2016 बैच की आईएएस अधिकारी जयति सिंह वर्तमान में बड़वानी जिले की कलेक्टर हैं। इससे पहले वे ग्वालियर में सहायक कलेक्टर, स्मार्ट सिटी ग्वालियर की सीईओ, जिला पंचायत जबलपुर और उज्जैन में भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं।उनकी छवि एक तेजतर्रार और संवेदनशील अधिकारी की रही है, जो शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती हैं।
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5C मॉडल से प्रशासन में सुधार
कलेक्टर जयति सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 5C मॉडल को अपनाया है। इसमें Commitment, Coordination, Communication, Completion और Control जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में समस्याओं के समाधान के लिए क्लस्टर शिविर, रात्रि चौपाल, युवाओं के लिए “युवा संगम” पोर्टल और पर्यावरण संरक्षण के लिए “ग्रीन कमांडो” जैसी पहल भी शुरू की गई हैं।
महिला नेतृत्व से बदल रही प्रशासनिक सोच
बड़वानी जिले में महिला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि प्रशासनिक नेतृत्व अब लैंगिक सीमाओं से आगे बढ़ चुका है। क्षमता और कार्यकुशलता के आधार पर महिलाएं बड़ी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
महिला नेतृत्व न केवल शासन की योजनाओं को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतार रहा है, बल्कि समाज में नेतृत्व की नई परिभाषा भी स्थापित कर रहा है।











