निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : कहते हैं जब संघर्ष जिद बन जाए तो किस्मत को भी अपना फैसला बदलना पड़ता है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम ने ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी देश के सामने रखी है। मध्यप्रदेश के इंदौर के रहने वाले 25 वर्षीय अक्षत बलदवा ने अपनी 100 प्रतिशत दृष्टिबाधिता को चुनौती देते हुए पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 173 हासिल कर इतिहास रच दिया।
अक्षत की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और मेहनत के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
हिंदी माध्यम से पढ़ाई, अंग्रेजी में दी परीक्षा
अक्षत ने अपनी स्कूली शिक्षा इंदौर के सरकारी सुभाष हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की, जहां उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई हिंदी माध्यम से की। हालांकि सिविल सेवा परीक्षा के लिए उन्होंने अंग्रेजी माध्यम को चुना और उसी में परीक्षा दी।यह फैसला उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन कड़ी मेहनत और निरंतर अभ्यास के दम पर उन्होंने इस चुनौती को भी पार कर लिया।
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दृष्टिबाधित श्रेणी में आवेदन, लेकिन ऑल इंडिया टॉप 200 में जगह
अक्षत ने यूपीएससी परीक्षा में दृष्टिबाधित श्रेणी के तहत आवेदन किया था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट के टॉप 200 में जगह बनाकर सभी को चौंका दिया।उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
फिलहाल बेंगलुरु में मौजूद अक्षत अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं। उनका कहना है कि मां मीना बलदवा और पिता संजय बलदवा ने हर कदम पर उनका साथ दिया और कभी भी उनके सपनों को टूटने नहीं दिया।परिवार के इसी सहयोग और विश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
हौसले ने दिलाई पहचान
बिना आंखों की रोशनी के भी अक्षत ने अपनी श्रवण शक्ति, मेहनत और मजबूत संकल्प के सहारे यह मुकाम हासिल किया है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती।
आज अक्षत बलदवा की यह उपलब्धि केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है और उन्होंने अपने शहर तथा प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।











