Thursday, August 27, 2026
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KK Kutare Caste Certificate Cancelled : फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे पर गिरी गाज; समिति ने प्रमाण-पत्र किया निरस्त

KK Kutare Caste Certificate Cancelled : रायपुर (06 मार्च 2026): एक लंबे समय से विवादों में घिरे प्रधानमंत्री सड़क योजना के चीफ इंजीनियर के.के. कुटारे के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र को अवैध पाते हुए उसे निरस्त कर दिया है। समिति की अध्यक्षता प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा कर रहे थे, जिन्होंने दस्तावेजों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का गहन परीक्षण करने के बाद यह कड़ा फैसला लिया है।

क्या था पूरा मामला? के.के. कुटारे पर आरोप था कि उन्होंने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र हासिल किया और उसी के आधार पर उच्च पदों पर नौकरी प्राप्त की। वर्ष 2017 से 2025 के बीच जनपद पंचायत डोंगरगांव के पदाधिकारियों द्वारा लगातार इसकी शिकायतें की जा रही थीं। इन शिकायतों में कहा गया था कि कुटारे मूल रूप से उस जाति के नहीं हैं जिसका लाभ वे ले रहे हैं। लंबे समय तक चली सुनवाई की प्रक्रिया के बाद समिति ने इस निष्कर्ष पर मुहर लगाई है।

दस्तावेजों ने खोली पोल जांच के दौरान समिति को तुमसर (महाराष्ट्र) नगरपालिका के अगस्त 1935 के जन्म रजिस्टर की एक प्रति मिली। इसमें कुटारे के दादा झुकल्या-गोविंदा का नाम दर्ज था और उनकी जाति ‘खटीक’ अंकित थी। वहीं, कुटारे ने अपना पक्ष रखते हुए बताया था कि उनके पिता 1953 से बालाघाट (मध्यप्रदेश) में कार्यरत थे, जिसके आधार पर उन्होंने 1978 में प्रमाण-पत्र लिया था। हालांकि, समिति ने सुप्रीम कोर्ट के ‘एक्शन कमेटी ऑन इश्यू ऑफ कास्ट सर्टिफिकेट’ बनाम भारत संघ (1994) के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि जाति प्रमाण-पत्र राज्य-विशेष होते हैं और किसी व्यक्ति को दूसरे राज्य की सूची का लाभ नहीं मिल सकता।

सेवा से बर्खास्तगी की संभावना जाति प्रमाण-पत्र के निरस्त होने के बाद अब के.के. कुटारे की सरकारी नौकरी पर संकट के बादल छा गए हैं। प्रशासनिक नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है, तो सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई अनिवार्य होती है। समिति द्वारा जारी इस आदेश को एक नजीर के तौर पर देखा जा रहा है, जो सरकारी नौकरियों में आरक्षण के गलत लाभ लेने वालों के लिए बड़ा संदेश है। अब देखना यह है कि राज्य शासन इस आदेश के बाद कितनी जल्दी उन्हें सेवा से हटाने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करती है।

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