Singrauli News: सिंगरौली: सिंगरौली जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर स्थित साईं डायग्नोस्टिक सेंटर इन दिनों मरीजों से कथित मनमानी वसूली, गलत जांच रिपोर्ट और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय मरीजों और उनके परिजनों ने सेंटर संचालक पर खुली लूट और लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था भी कटघरे में आ गई है।
अल्ट्रासाउंड जांच के नाम पर मनमाना शुल्क..
मरीजों का आरोप है कि सेंटर में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए निर्धारित दरों से कहीं अधिक रकम वसूली जा रही है। एक मरीज ने बताया कि उससे अल्ट्रासाउंड के नाम पर ₹1200 लिए गए, जबकि सामान्यतः इसी जांच की कीमत 600 से 800 रुपये के बीच होती है। लोगों का कहना है कि जांच शुल्क को लेकर कोई स्पष्ट रेट लिस्ट भी प्रदर्शित नहीं की गई है, जिससे मरीजों को मजबूरी में तय रकम चुकानी पड़ती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर मरीज सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि गंभीर बीमारी या गर्भावस्था की स्थिति में उन्हें तत्काल जांच करानी पड़ती है और विकल्प न होने के कारण वे अधिक शुल्क देने को मजबूर हो जाते हैं।
बिना विशेषज्ञ डॉक्टर के जांच कराने का आरोप
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप सामने आया है कि सेंटर में नियमित रूप से योग्य विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी नहीं रहती। गोपनीय सूत्रों का दावा है कि कई बार अल्ट्रासाउंड मशीन संचालित करने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित डॉक्टर नहीं बल्कि वार्ड बॉय स्तर का कर्मचारी होता है, जो केवल सीखने के आधार पर जांच करता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों की जान के साथ गंभीर खिलवाड़ भी माना जाएगा।
गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट से बढ़ा खतरा
एक मामले ने पूरे क्षेत्र में चिंता और आक्रोश बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि एक गर्भवती महिला ने इसी सेंटर में अल्ट्रासाउंड कराया था, जिसकी रिपोर्ट में केवल एक बच्चे का उल्लेख किया गया। जबकि बाद में चिकित्सकीय जांच में महिला के गर्भ में जुड़वा बच्चे होने की पुष्टि हुई। गलत रिपोर्ट के कारण महिला का उपचार भी उसी आधार पर चलता रहा, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। हालांकि बाद में डॉक्टरों की सूझबूझ से सुरक्षित डिलीवरी कराकर दोनों बच्चों को बचा लिया गया, लेकिन इस घटना ने सेंटर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्टाफ की योग्यता पर भी सवाल
मरीजों का आरोप है कि सेंटर में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में बैठे कर्मचारियों को मरीजों का नाम तक सही तरीके से दर्ज करना नहीं आता। इसके बावजूद उन्हें पर्ची काटने और डेटा संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। लोगों का कहना है कि कम वेतन में अनुभवहीन कर्मचारियों को रखकर संचालक खर्च बचा रहे हैं, जबकि मरीजों से भारी शुल्क वसूला जा रहा है।
Singrauli News: सुविधाओं के नाम पर शून्य व्यवस्था
साईं डायग्नोस्टिक सेंटर पर केवल जांच शुल्क ही नहीं बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे लोगों को घंटों बाहर या सड़क किनारे खड़े रहना पड़ता है।
इसके अलावा पार्किंग व्यवस्था भी बेहद खराब बताई जा रही है। जांच कराने आने वाले लोगों के वाहन सड़क किनारे खड़े होने से आसपास यातायात अव्यवस्थित होने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
लोगों में बढ़ता आक्रोश, जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब सेंटर जांच के नाम पर मोटी रकम वसूल रहा है, तो मरीजों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है। लोगों ने जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और निरीक्षण किए जाते, तो मरीजों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
Singrauli News: अब निगाहें जिला स्वास्थ्य अधिकारी और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इन गंभीर आरोपों पर कब संज्ञान लेते हैं। क्या जांच के नाम पर कथित लापरवाही और मनमानी वसूली पर रोक लगेगी या फिर मरीजों के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे संचालकों को खुली छूट मिलती रहेगी — यह आने वाला समय तय करेगा।











