Bhopal Gas Crisis: कमर्शियल गैस की किल्लत से जूझ रहे कैफे-रेस्टोरेंट, इंडक्शन बना सहारा

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। इस संकट का सीधा असर कैफे, रेस्टोरेंट और छोटे फूड कारोबारियों पर पड़ रहा है।गैस की कमी के कारण कई जगह तंदूर की आंच ठंडी पड़ गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इंडक्शन पर चल रहा किचन

गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण कई कैफे और रेस्टोरेंट संचालकों को अब इंडक्शन और इलेक्ट्रिक उपकरणों का सहारा लेना पड़ रहा है।हालांकि, यह विकल्प महंगा साबित हो रहा है और इससे बिजली बिल में करीब 20% तक बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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छोटे कारोबारियों पर ज्यादा असर

इस संकट का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं पर पड़ा है। कई लोग मजबूरी में घरेलू गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ भी है।गैस की अनियमित आपूर्ति के कारण उनका रोज का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

तंदूर और फास्ट फूड कारोबार पर असर

गैस की कमी से तंदूर आधारित व्यंजन जैसे रोटी, नान और कबाब बनाना मुश्किल हो गया है। वहीं, फास्ट फूड और चाय दुकानों में भी स्वाद और गुणवत्ता पर असर पड़ा है।ग्राहकों को पहले जैसा स्वाद नहीं मिल पा रहा, जिससे ग्राहक संख्या में भी गिरावट देखने को मिल रही है।

कारोबारियों की बढ़ी चिंता

फूड कारोबारियों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की नियमित सप्लाई सुनिश्चित की जाए, ताकि कारोबार सुचारू रूप से चल सके।

क्या है संकट की वजह?

हालांकि प्रशासन की ओर से स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है, लेकिन सप्लाई चेन में बाधा और बढ़ती मांग को इस संकट की वजह माना जा रहा है।स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो यह संकट और गहरा सकता है।

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