Samvida Karmachari Mahasangh Protest : रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के लगभग पचास हजार संविदा कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांगें आज भी अधूरी हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट में संविदा कर्मचारियों के हित में कोई ठोस घोषणा या विशेष प्रावधान नहीं किए जाने से कर्मचारियों में निराशा व्याप्त है।
छत्तीसगढ़ संविदा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री कौशलेश तिवारी एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री पुरन दास ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि संविदा कर्मचारी वर्षों से नियमितीकरण, वेतन विसंगति दूर करने, सेवा सुरक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। प्रदेश की विभिन्न शासकीय योजनाओं और विभागों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें स्थायित्व एवं सम्मानजनक वेतन सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार के बजट से संविदा कर्मचारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, किंतु कोई स्पष्ट नीति या राहत की घोषणा नहीं होने से कर्मचारियों को मायूसी हाथ लगी है। इसके बावजूद संविदा कर्मचारी सरकार से सकारात्मक निर्णय की आशा लगाए हुए हैं।
संघ ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं को केवल आश्वासन तक सीमित न रखकर ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए। यदि शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो कर्मचारियों को आंदोलन की रणनीति पर विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
महासंघ ने यह भी स्मरण कराया कि भाजपा के घोषणा पत्र एवं प्रधानमंत्री की गारंटी में संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण एवं नियमितीकरण का उल्लेख किया गया था। सरकार के गठन को ढाई वर्ष बीत चुके हैं, किंतु अब तक संविदा कर्मचारियों की मांगें लंबित हैं।
संघ ने शासन से पुनः आग्रह किया है कि संविदा कर्मचारियों की लंबित मांगों पर संवेदनशीलता एवं गंभीरता के साथ निर्णय लेकर उन्हें न्याय प्रदान किया जाए।











