Chhattisgarh High Court Stay : गौरी शंकर गुप्ता/बिलासपुर (27 फरवरी 2026): छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक को नगर पंचायत में तब्दील करने की प्रक्रिया के दौरान चुनी हुई ग्राम पंचायत को भंग कर ‘समिति’ बैठाने के सरकारी फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कानून को दरकिनार कर प्रशासनिक समितियों को सत्ता सौंपना उचित नहीं है।
अदालत में कानून की जीत याचिकाकर्ता ग्राम पंचायत तमनार की ओर से एडवोकेट हमीदा सिद्दीकी ने दलील दी कि नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 5(1) के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि जब तक नई नगर पंचायत के विधिवत चुनाव नहीं हो जाते, तब तक पुरानी ग्राम पंचायत ही अस्तित्व में रहेगी। सरकार द्वारा 16 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना, जिसके तहत एक समिति का गठन कर सरपंच-पंचों के अधिकार छीन लिए गए थे, उसे अदालत ने प्रथम दृष्टया कानून का उल्लंघन माना।
अनुसूचित क्षेत्र का संवैधानिक पेच सुनवाई के दौरान यह बिंदु भी प्रभावी रहा कि तमनार एक ‘अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र’ (Scheduled Area) है। ऐसे क्षेत्रों में पंचायतों की शक्तियों को सीमित करना या उन्हें प्रशासनिक समितियों में बदलना संवैधानिक रूप से पेचीदा और गंभीर मामला है। अदालत ने शासन की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह प्रक्रिया किसी पुराने प्रस्ताव के आधार पर की गई है।
फैसले के मुख्य बिंदु:
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अधिकारों की बहाली: तमनार ग्राम पंचायत अब पूर्व की भांति अपने सभी प्रशासनिक और वित्तीय कामकाज संभाल सकेगी।
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समिति भंग: सरकार द्वारा गठित की गई प्रशासनिक समिति के सभी अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
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अगली सुनवाई तक स्टे: न्यायालय ने इस रोक को अगली सुनवाई तक प्रभावी रखा है और राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है।

यह फैसला उन ग्राम पंचायतों के लिए एक बड़ी नजीर साबित होगा जहाँ नगर पंचायत बनाने की आड़ में निर्वाचित प्रतिनिधियों को समय से पूर्व हटाया जा रहा था। तमनार में अब सरपंच और पंच पुनः अपने पदों पर सक्रिय हो गए हैं।











