भोपाल: मध्य प्रदेश में रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता विवेक त्रिपाठी ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर आरोप लगाया कि प्रदेश में बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और लोक शिक्षण संचालनालय से जुड़े विभागों में फर्जी नियुक्तियों का संगठित रैकेट संचालित हो रहा है।
निजी एजेंसी से मिलीभगत का आरोप
त्रिपाठी ने दावा किया कि ओम पारस मैनपॉवर सर्विस, भोपाल नामक एजेंसी के माध्यम से नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां दी गईं। उनका कहना है कि यह पूरा मामला विभागीय स्तर पर मिलीभगत का संकेत देता है।
बिना विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के भर्ती
कांग्रेस नेता के अनुसार संबंधित पदों के लिए न तो कोई आधिकारिक विज्ञापन जारी हुआ, न ही ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए और नियमित चयन प्रक्रिया का पालन भी नहीं किया गया। इसके बावजूद कुछ अधिकारियों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से दोबारा सेवा में लिया गया और उन्हें 35 हजार से 64 हजार रुपये तक मासिक वेतन दर्शाया गया।
उच्च स्तरीय जांच और एफआईआर की मांग
त्रिपाठी ने बताया कि कांग्रेस ने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, स्कूली शिक्षा विभाग, श्रम विभाग, गृह विभाग, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग, लोक शिक्षण संचालनालय और पुलिस महानिदेशक को लिखित शिकायत भेजी है। साथ ही तत्काल उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
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बेरोजगार युवाओं के अधिकारों पर सवाल
उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि दूसरी ओर सेवानिवृत्त या सेवा में रहे अधिकारियों को नियम विरुद्ध लाभ पहुंचाया जा रहा है। कांग्रेस ने इसे संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति में रोजगार और भर्ती प्रक्रिया को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।











