ICC strict stance : नई दिल्ली। टी20 वर्ल्ड कप के बीच उठा भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर विवाद महज एक मैच तक सीमित नहीं रहा। बीते 48 घंटों में यह मामला पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद और वैश्विक क्रिकेट व्यवस्था के बीच टकराव का रूप ले चुका था, लेकिन सख्त चेतावनी और संभावित नुकसान के आकलन के बाद अंततः PCB को अपने रुख से पीछे हटना पड़ा।
ICC strict stance : विवाद की शुरुआत भारत के खिलाफ ग्रुप मैच को लेकर PCB के भीतर बढ़ती असहजता से हुई। हालिया घटनाक्रम के बाद बहिष्कार का विकल्प खुले तौर पर चर्चा में आने लगा, जिससे ICC को हस्तक्षेप करना पड़ा। ICC के लिए यह सिर्फ एक हाई-प्रोफाइल मुकाबला नहीं, बल्कि टूर्नामेंट की विश्वसनीयता, ब्रॉडकास्टिंग कॉन्ट्रैक्ट्स और वैश्विक संचालन का सवाल था।
ICC strict stance : ICC ने शुरुआती दौर में ही स्पष्ट कर दिया कि तय शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं होगा। मैच न खेलने की स्थिति को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके तहत वॉकओवर हार, अंक कटौती और आर्थिक दंड जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं। यह ICC का अब तक का सबसे सख्त रुख माना गया।
ICC strict stance : शुरुआत में PCB अपने फैसले पर अड़ा रहा। बोर्ड के भीतर इसे ‘सिद्धांतों पर आधारित रुख’ बताया गया और यह संदेश देने की कोशिश की गई कि वह घरेलू राजनीतिक दबावों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। पाकिस्तानी मीडिया में भी बहिष्कार को मजबूत कदम के तौर पर पेश किया गया। इसी दौरान ICC और PCB के बीच बैक-चैनल बातचीत तेज हो गई।
ICC strict stance : शनिवार शाम से शुरू हुई अनौपचारिक चर्चाओं में ICC ने साफ कर दिया कि कोई भी बोर्ड टूर्नामेंट को बंधक नहीं बना सकता। अगर एक टीम पीछे हटती है तो बाकी टीमें और ब्रॉडकास्टर्स इसका खामियाजा क्यों भुगतें। यहीं से मामला सार्वजनिक बयानबाजी से निकलकर नुकसान और जोखिम के गणित में बदल गया।
रविवार तक PCB के भीतर दो गुट साफ नजर आने लगे। एक गुट सख्त रुख बनाए रखने के पक्ष में था, जबकि दूसरा ICC से टकराव के दीर्घकालिक असर को लेकर चिंतित दिखा। सवाल उठा कि क्या एक मैच के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अलग-थलग पड़ना समझदारी होगी। इस दौरान पूर्व खिलाड़ियों, पूर्व अधिकारियों और कानूनी सलाहकारों की राय भी ली गई।
रविवार दोपहर ICC ने दोबारा दोहराया कि मैच न खेलने की स्थिति में वॉकओवर हार तय है और किसी तरह की विशेष छूट नहीं दी जाएगी। इस संदेश ने PCB को साफ संकेत दे दिया कि इस बार ICC पीछे हटने के मूड में नहीं है।
सोमवार सुबह तक PCB ने आकलन किया कि बहिष्कार से भारी आर्थिक नुकसान होगा, ICC के साथ रिश्ते खराब होने का खतरा है और खिलाड़ियों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। इसके बाद बहिष्कार की भाषा चुपचाप आधिकारिक बयानों से गायब होने लगी।
ICC strict stance : अंततः सोमवार दोपहर PCB ने संकेत दिए कि टीम तय शेड्यूल के अनुसार खेलेगी। ICC ने भी स्पष्ट किया कि कोई पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी और टूर्नामेंट अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगा।
ICC strict stance : यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि ICC अब टूर्नामेंट संचालन को लेकर जीरो टॉलरेंस मोड में है और PCB ने यह समझ लिया कि क्रिकेट में टकराव की भी एक सीमा होती है। 48 घंटे पहले जो मामला बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता दिख रहा था, वह आखिरकार व्यावहारिकता और समझौते पर आकर समाप्त हुआ।













