मध्य प्रदेश कैडर के चर्चित IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का इस्तीफा, प्रशासन में हलचल

भोपाल : मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस संबंध में केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश राज्य सरकार को औपचारिक रूप से जानकारी दे दी है। उनके इस्तीफे की पुष्टि पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कर दी है। अभिषेक तिवारी पिछले दो वर्षों से दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे।

दिल्ली में राष्ट्रीय एजेंसी में थे तैनात

फिलहाल आईपीएस अभिषेक तिवारी नेशनल टेक्नोलॉजी रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में पदस्थ हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अंतर्गत कार्य करती है। इससे पहले वे मध्य प्रदेश के बालाघाट और सागर जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल को प्रशासनिक दक्षता और अनुशासन के लिए जाना जाता रहा है।

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निजी कारणों का हवाला, कारण बना रहस्य

अभिषेक तिवारी के इस्तीफे के पीछे निजी कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस्तीफे के ठोस कारण स्पष्ट नहीं किए हैं, जिस वजह से प्रशासनिक और पुलिस महकमे में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस्तीफा मंजूर होने के बाद वे किसी नए क्षेत्र में कार्य करने की योजना बना सकते हैं।

पुरस्कारों और उपलब्धियों से भरा रहा करियर

आईपीएस अभिषेक तिवारी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए दो बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा मध्य प्रदेश सरकार ने भी उन्हें कई बार विशेष उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। कानून-व्यवस्था, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और संवेदनशील मामलों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती रही है।

सागर हादसे के बाद बदला था कार्यक्षेत्र

सागर जिले में पदस्थापना के दौरान एक दर्दनाक घटना के बाद वे सुर्खियों में आए थे। बारिश के दौरान दीवार गिरने से नौ मासूम बच्चों की मौत के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी को हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली भेजा गया, जहां वे NTRO से जुड़े।

अभी बाकी है इस्तीफे की औपचारिक मंजूरी

अभिषेक तिवारी का इस्तीफा अभी विभिन्न स्तरों पर मंजूरी की प्रक्रिया में है। विभागीय रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय और मध्य प्रदेश गृह विभाग की स्वीकृति अनिवार्य होगी। इसके बाद ही उनका वीआरएस औपचारिक रूप से प्रभावी माना जाएगा।

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