भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो ट्रेन के संचालन को एक माह पूरा हो चुका है, लेकिन पहले ही महीने में इसकी आर्थिक स्थिति चिंता का विषय बन गई है। 21 दिसंबर को भोपाल मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हुआ था, जिसे लेकर शहरवासियों में खासा उत्साह देखा गया। शुरुआती दिनों में बड़ी संख्या में लोगों ने मेट्रो में सफर किया, लेकिन समय बीतने के साथ अब यात्रियों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
पहले महीने से ही घाटे में मेट्रो
मेट्रो प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भोपाल मेट्रो पर रोजाना करीब 8 लाख रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें बिजली, कर्मचारियों का वेतन, रखरखाव और संचालन से जुड़ी अन्य लागत शामिल हैं। इसके मुकाबले टिकट और अन्य स्रोतों से होने वाली आय महज 15 हजार रुपये प्रतिदिन बताई जा रही है। इस तरह आय और व्यय के बीच बड़ा अंतर मेट्रो परियोजना की स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहा है।
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यात्रियों की संख्या में गिरावट
कमर्शियल रन के शुरुआती दिनों में भोपालवासियों ने मेट्रो का जमकर लुत्फ उठाया। नई सुविधा होने के कारण लोग उत्सुकता से सफर कर रहे थे। हालांकि, अब यह उत्साह धीरे-धीरे कम होता नजर आ रहा है। रोजाना यात्रियों की संख्या घटने से टिकट बिक्री भी प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर मेट्रो की आमदनी पर पड़ा है।
सीमित रूट और कनेक्टिविटी बनी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल मेट्रो का संचालन सीमित रूट पर होने के कारण ज्यादा लोग इसका नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। जब तक मेट्रो नेटवर्क का विस्तार नहीं होता और इसे शहर के प्रमुख इलाकों से नहीं जोड़ा जाता, तब तक यात्रियों की संख्या बढ़ना मुश्किल माना जा रहा है।
प्रशासन की उम्मीद
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि यह शुरुआती चरण है और भविष्य में स्थिति में सुधार की उम्मीद है। आने वाले समय में रूट विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रचार-प्रसार के जरिए यात्रियों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जैसे-जैसे लोग मेट्रो को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे, आय में भी इजाफा होगा।
जनता के मन में सवाल
हालांकि, लगातार हो रहे घाटे को लेकर आम जनता के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इतनी बड़ी परियोजना को बिना पर्याप्त यात्री आधार के शुरू करना सही फैसला था। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो घाटे से उबर पाती है या नहीं।फिलहाल, भोपाल मेट्रो का पहला महीना उम्मीदों से उलट आर्थिक चुनौतियों से जूझता नजर आ रहा है।













