Singrauli News: सिंगरौली। सिंगरौली जिले के सरई तहसील में स्थित बंधा कोल ब्लॉक के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वासन और मुआवजा वितरण में करीब 900 करोड़ रुपये के कथित आर्थिक भ्रष्टाचार का मामला अब आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ रीवा (EOW) तक पहुंच गया है। पिछड़ावर्ग राष्ट्रीय समन्वयक एवं किसान नेता कुँवर सिंह पटेल ने EOW रीवा को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला एवं भू-अर्जन अधिकारी/संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि सुनियोजित तरीके से कानूनों की अनदेखी कर आदिवासी-वनवासी बहुल क्षेत्र में मुआवजे की भारी रकम का दुरुपयोग किया गया।
1300 करोड़ के बजाय 400 करोड़ का अवार्ड, 900 करोड़ का गबन का आरोप
कुँवर सिंह पटेल के अनुसार, बंधा कोल परियोजना में कुल लगभग 1300 करोड़ रुपये का मुआवजा अवार्ड पारित होना चाहिए था, लेकिन कथित तौर पर केवल लगभग 400 करोड़ रुपये का ही अवार्ड जारी किया गया। आरोप है कि करीब 900 करोड़ रुपये की राशि का या तो गलत आकलन किया गया या फिर जानबूझकर हितग्राहियों को वंचित कर दिया गया। इस प्रक्रिया में 10 हजार से अधिक लोगों के मकान, झोपड़ियां, बाग-बगीचे, फलदार पेड़, ट्यूबवेल, हैंडपंप और अन्य परिसंपत्तियों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया।
भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में भारी विसंगतियां
ज्ञापन में बताया गया कि EMIL Mines & Mineral Resources Limited को आवंटित इस कोल ब्लॉक में प्रभावित ग्राम तेंदुहा, पीढ़रवाह, देवरी, बंधा और पचोर शामिल हैं। परियोजना के तहत 776.01 हेक्टेयर निजी भूमि और 289.4 हेक्टेयर शासकीय भूमि के अधिग्रहण के आदेश पारित किए गए।
लेकिन परिसंपत्तियों के आकलन में बार-बार विरोधाभास सामने आए— 08 नवंबर 2024 के पत्र में 2787 मकानों में विसंगति, 18 दिसंबर 2024 के आदेश में 3491 मकानों में विसंगति, बाद में प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कुल 5907 मकान बताए गए, आरोप है कि इन आंकड़ों के बीच बड़े पैमाने पर फर्जी या अधूरे मूल्यांकन कर अवार्ड पारित किया गया।
कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप
कुँवर सिंह पटेल ने कहा कि आपत्तियों की सुनवाई भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की निर्धारित धाराओं के विपरीत की गई। धारा 26 के तहत बाजार मूल्य निर्धारण के नियमों की अनदेखी कर कलेक्टर गाइडलाइन के न्यूनतम दरों पर मुआवजा तय किया गया, जबकि अधिकतम दर अपनाई जानी चाहिए थी।
इसके अलावा पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम 2006 की धारा 3 और 4 का भी कथित रूप से उल्लंघन किया गया। आरोप है कि ग्राम सभा की जगह ‘भय सभा’ आयोजित की गई और सामुदायिक वन अधिकार, आवास अधिकार तथा विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों के अधिकारों को समाप्त कर दिया गया।
आदिवासी आजीविका और संस्कृति पर संकट
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि सिंगरौली जिले में अब तक सामुदायिक वन अधिकारों का विधिवत निस्तारण नहीं हुआ, जबकि अधिकांश आदिवासी परिवार तेंदू पत्ता, महुआ और अन्य वनोपज पर निर्भर हैं। गलत मुआवजा निर्धारण और विस्थापन से न केवल उनकी आजीविका, बल्कि संस्कृति और सामाजिक संरचना को भी गहरा आघात पहुंचा है। इसे सामाजिक और आर्थिक अन्याय बताया गया है।
EOW से जांच और कार्रवाई की मांग
कुँवर सिंह पटेल ने EOW रीवा से मांग की है कि बंधा कोल ब्लॉक परियोजना में पारित अवार्ड, मूल्यांकन दस्तावेज, कंपनी पत्राचार और प्रशासनिक आदेशों की विस्तृत जांच कराई जाए। साथ ही तत्कालीन कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला, संयुक्त कलेक्टर राजेश शुक्ला एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 900 करोड़ के कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। अब सबकी नजरें EOW की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि बंधा कोल ब्लॉक परियोजना में हुए निर्णय भ्रष्टाचार का परिणाम थे या प्रशासनिक लापरवाही।









