Government School Dongri : सिंगरौली: मध्य प्रदेश सरकार एक ओर सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट’ बनाने का दावा कर रही है, वहीं सिंगरौली जिले का शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय डोंगरी शिक्षा विभाग की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। यहाँ विकास के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई है, जबकि धरातल पर बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
बिना बिजली कैसे होगा ‘स्मार्ट’ भविष्य? विद्यालय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहाँ डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षाओं में स्मार्ट बोर्ड तो लगा दिए गए हैं, लेकिन विद्यालय में बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये के ये बोर्ड केवल दीवारों की शोभा बढ़ा रहे हैं। बच्चे आज भी पुराने ढर्रे पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि रिकॉर्ड में स्कूल को आधुनिक दिखाया जा रहा है।
कुएं का पानी और बदहाल शौचालय: विद्यालय में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटे-छोटे बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए स्कूल से दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। शौचालय और बाथरूम की स्थिति इतनी खराब है कि वे इस्तेमाल के लायक ही नहीं हैं। स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच स्कूल परिसर में फैली गंदगी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
सवालों से भागे प्राचार्य: जब इस अव्यवस्था को लेकर विद्यालय के प्राचार्य जोहन सिंह से सवाल किए गए, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वे जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय कैमरा देखते ही अपनी कुर्सी छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए। प्राचार्य का यह गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार यह स्पष्ट करता है कि विद्यालय प्रशासन बच्चों के भविष्य को लेकर कितना लापरवाह है।
“हमें बहुत दूर से पानी लाना पड़ता है। स्कूल में लगा बोर्ड कभी चालू ही नहीं हुआ क्योंकि यहाँ लाइट नहीं है। हमें पढ़ाई करने में बहुत दिक्कत होती है।” — विद्यालय के छात्र











