China Cyber Security Law 2026 : बीजिंग/नई दिल्ली। वैश्विक तकनीकी युद्ध (Tech War) में चीन ने अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चीन ने अपनी डिजिटल सीमाओं को अभेद्य बना लिया है। नए कानून के तहत अब चीन में काम करने वाली कंपनियों के लिए पालो ऑल्टो, क्राउडस्ट्राइक और चेक पॉइंट जैसे विदेशी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना न केवल मुश्किल, बल्कि आर्थिक रूप से जोखिम भरा हो गया है।
नए कानून की 5 सबसे सख्त बातें:
1. ‘अनसर्टिफाइड’ सॉफ्टवेयर पर बैन: आर्टिकल 23 के तहत, अब हर विदेशी साइबर सुरक्षा उत्पाद को चीन सरकार की कड़ी जांच और सर्टिफिकेशन से गुजरना होगा। बिना सरकारी मंजूरी के किसी भी सॉफ्टवेयर को बेचना या इस्तेमाल करना अब गैरकानूनी है।
2. 1 करोड़ युआन का भारी जुर्माना: आर्टिकल 62 के तहत, यदि कोई चीनी कंपनी अनसर्टिफाइड विदेशी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती पाई गई, तो उस पर 1 करोड़ युआन (लगभग 14 लाख डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह नियम कंपनियों को विदेशी टेक छोड़कर ‘स्वदेशी’ अपनाने पर मजबूर कर रहा है।
3. डेटा लोकलाइजेशन (आर्टिकल 37): अब चीन में इकट्ठा किया गया कोई भी डेटा देश की सीमा से बाहर नहीं जा सकता। इसने क्लाउड-आधारित कंपनियों जैसे विज (Wiz) और सेंटिनेल-वन के लिए संकट खड़ा कर दिया है, क्योंकि उनका वर्किंग मॉडल ग्लोबल सर्वर्स पर डेटा विश्लेषण पर टिका है।
4. सीमा पार कार्रवाई का अधिकार: सबसे हैरान करने वाला बदलाव एक्स्ट्राटेरिटोरियल पहुंच (Extra-territorial Reach) है। अब चीन विदेश में बैठी किसी भी ऐसी कंपनी की संपत्ति फ्रीज कर सकता है, जिसका सॉफ्टवेयर चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘खतरा’ माना जाएगा।
5. अमेरिकी-इजरायली कंपनियों को बड़ा झटका: रॉयटर्स के अनुसार, इस कानून की सीधी मार वीएमवेयर, फोर्टिनेट, मैनडियंट, और रैपिड7 जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों और इजरायल की चेक पॉइंट सॉफ्टवेयर पर पड़ी है।
निष्कर्ष: पश्चिमी तकनीक से पूर्ण विच्छेद चीन का यह कदम साफ संकेत है कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को पश्चिमी सॉफ्टवेयर की निर्भरता से पूरी तरह मुक्त करना चाहता है। ‘डेटा से लेकर सॉफ्टवेयर तक’ सब कुछ चीन के नियंत्रण में रखने की यह नीति वैश्विक टेक इंडस्ट्री के समीकरणों को हमेशा के लिए बदल सकती है।













