PESA Act Violation Surguja : अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आज एक ऐतिहासिक जनआंदोलन देखने को मिला। अंबिकापुर के बीटीआई ग्राउंड में हजारों की संख्या में आदिवासी, किसान, मजदूर और युवा एकत्रित हुए। ‘हसदेव बचाओ आंदोलन’ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार से पांचवीं अनुसूची के तहत ग्रामसभाओं के अधिकारों का सम्मान करने और खनन परियोजनाओं पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।
संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि सरगुजा पांचवीं अनुसूची का क्षेत्र है। यहाँ पेसा कानून 1996 और भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत किसी भी परियोजना के लिए ग्रामसभा की पूर्व सहमति अनिवार्य है। आरोप है कि सरकार और निजी कंपनियां ग्रामसभाओं की अनदेखी कर जबरन भूमि अधिग्रहण और जंगलों की कटाई कर रही हैं।
हसदेव से लेकर मैनपाट तक संकट: आंदोलनकारियों ने हसदेव अरण्य में हो रही अंधाधुंध पेड़ कटाई पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि परसा और केंते एक्सटेंशन जैसी परियोजनाओं से न केवल जैव विविधता नष्ट हो रही है, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष भी बढ़ रहा है। इसके अलावा:
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रामगढ़ पहाड़: खनन विस्फोटों के कारण प्राचीन पुरातात्विक स्थलों में दरारें आ रही हैं।
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मैनपाट: यहाँ प्रस्तावित बॉक्साइट खनन से अंबिकापुर के जलस्रोतों और प्राकृतिक सौंदर्य पर खतरा मंडरा रहा है।
प्रमुख 13 सूत्रीय मांगें:
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हसदेव अरण्य की केंते एक्सटेंशन और परसा कोल ब्लॉक की स्वीकृति तुरंत रद्द की जाए।
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ग्रामसभा की सहमति के बिना चल रही मदननगर और अमेरा विस्तार परियोजनाएं निरस्त हों।
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मैनपाट में बॉक्साइट खनन रोककर उसे ‘ईको-टूरिज्म’ जोन घोषित किया जाए।
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खनन का विरोध करने वाले ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं पर दर्ज ‘फर्जी मुकदमे’ वापस लिए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी: हसदेव बचाओ आंदोलन के नेताओं ने दो-टूक शब्दों में कहा कि जुलाई 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से खनन निरस्त करने का संकल्प पारित किया था, जिसका पालन होना चाहिए। यदि सरकार ने इन मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो यह आंदोलन दिल्ली और रायपुर की सड़कों तक और अधिक उग्र रूप में पहुंचेगा।













