CBI Digital Arrest Investigation : नई दिल्ली। देश में बढ़ते ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इसकी जांच की कमान सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र ने बताया कि गृह मंत्रालय ने इन घोटालों से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय 13 सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई को उन बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की भी पूरी छूट होगी, जिनकी मिलीभगत से फर्जी खाते खोलकर ठगी की राशि जमा की जाती है।
13 सदस्यीय समिति करेगी समाधान की तलाश: गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में गठित इस समिति में RBI, MeitY, टेलीकॉम मंत्रालय और NIA जैसे प्रमुख विभागों के अधिकारी शामिल हैं। यह समिति डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल्स और ऑनलाइन ठगी के तकनीकी व कानूनी पहलुओं की जांच कर एक महीने के भीतर एक्शन प्लान तैयार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दर्ज दिल्ली पुलिस की एफआईआर को पहले ही सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया है।
रडार पर बैंकर्स और AI तकनीक: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए कहा कि सीबीआई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत उन बैंकर्स की भी जांच कर सकेगी, जो ठगों को खाते उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने रिजर्व बैंक (RBI) को भी नोटिस जारी कर पूछा है कि ऐसे संदिग्ध खातों की पहचान करने और अपराध की कमाई को तुरंत फ्रीज करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का उपयोग कब तक शुरू किया जाएगा।













