Mauganj Witness Scam : मऊगंज में खाकी का ‘गवाह घोटाला’ बेनकाब: 1000 केस, 6 चेहरे और पुलिस की फर्जी स्क्रिप्ट का पर्दाफाश

VIKASH KHALKHO

Mauganj Witness Scam : मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में खाकी के एक ऐसे ‘गवाह सिंडिकेट’ का खुलासा हुआ है, जिसने कानून और न्याय व्यवस्था की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। लौर और नईगढ़ी थाने की पुलिस ने कागजों पर केस मजबूत करने के चक्कर में न्याय का गला घोंट दिया। CCTNS पोर्टल के एक क्लिक ने पुलिस की उस काली स्क्रिप्ट की पोल खोल दी, जिसमें 1000 मुकदमों की गवाही महज 6 लोगों के कंधों पर टिकी थी।

यह घोटाला इतना बड़ा है कि इसने इंदौर के उस चर्चित ‘पॉकेट गवाह’ मामले को भी पीछे छोड़ दिया है जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई थी। मऊगंज में तत्कालीन थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के कार्यकाल में खाना बनाने वाले रसोइयों और सरकारी गाड़ी के ड्राइवरों को ‘पेशेवर चश्मदीद’ बना दिया गया।

पुलिस के ‘पॉकेट गवाहों’ की दर्दनाक दास्तां

पुलिस ने अपनी सुविधानुसार गवाहों की एक ऐसी फौज तैयार की, जो वास्तव में घटनाओं से कोसों दूर थे:

  • दिनेश कुशवाहा: कभी थाने में खाना बनाता था और अब सब्जी बेचकर गुजारा करता है। उसे पता ही नहीं चला कि कब वह सैकड़ों केसों का ‘सरकारी गवाह’ बन गया। आज वह कोर्ट के चक्कर काटते-काटते बर्बाद हो चुका है।

  • राहुल विश्वकर्मा: साहब की गाड़ी चलाता था। पुलिस ने यह कहकर दस्तखत कराए कि “मामला यहीं सेटल हो जाएगा”, लेकिन अब वह कानून के जाल में बुरी तरह फंस गया है।

  • अरुण तिवारी: शारीरिक रूप से अक्षम अरुण बिना सहारे चल नहीं सकते, लेकिन पुलिस की फाइलों में वे उन वारदातों के चश्मदीद हैं जहां पहुंचना उनके लिए शारीरिक रूप से असंभव था।

  • अमित कुशवाहा: सिंडिकेट का सबसे खास चेहरा, जो 500 से अधिक मामलों में गवाह है। चर्चा है कि जहां साहब का तबादला होता, अमित भी वहीं पहुंच जाता।

समाजसेवी की शिकायत और प्रशासनिक हड़कंप

समाजसेवी कुंज बिहारी तिवारी ने जब दस्तावेजों के साथ मुख्यमंत्री, डीजीपी और आईजी तक यह मामला पहुंचाया, तब जाकर मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने एक्शन लिया। विवादों में घिरे थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वर्तमान विधायक गिरीश गौतम ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की बात कही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन हजारों मुकदमों का क्या होगा जिनमें इन ‘फर्जी गवाहों’ के आधार पर लोगों को सजा हुई या वे जेलों में बंद हैं?

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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