Aravalli Range Dispute : नई दिल्ली: कांग्रेस ने अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण को लेकर केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि सरकार की नई नीतियों और अरावली की बदली गई परिभाषा के कारण इस प्राचीन पर्वत श्रृंखला का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने चेतावनी दी है कि यह कदम पहले से ही नाजुक हो चुके पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह तबाह कर देगा।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला सिर्फ अवैध खनन तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की सिफारिशों को दरकिनार कर दिल्ली और जयपुर की सरकारें अरावली में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के लिए दरवाजे खोल रही हैं। कांग्रेस के अनुसार, अरावली की नई परिभाषा लागू होने से इसका 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो जाएगा, जिससे वहां अंधाधुंध निर्माण और खनन की छूट मिल जाएगी।
अरावली की परिभाषा को लेकर विवाद उस समय गहराया जब सुप्रीम कोर्ट ने विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर एक मानक तय किया था। पूर्व की परिभाषा के अनुसार, आसपास की जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंची भू-आकृति को ‘अरावली पहाड़ी’ माना गया था। साथ ही, 500 मीटर के दायरे में ऐसी दो या अधिक पहाड़ियों की मौजूदगी को ‘अरावली श्रृंखला’ की श्रेणी में रखा गया था। इसी आधार पर न्यायालय ने दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में नई खनन लीज पर रोक लगाई थी।
ताजा घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को एक महत्वपूर्ण सुनवाई की। मामले की संवेदनशीलता और बढ़ते विवाद को देखते हुए न्यायालय ने अपने पिछले फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट के इस रुख के बाद अब सभी की नजरें अरावली के भविष्य को लेकर आने वाले सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्देशों पर टिकी हैं।
पर्यावरणविदों का मानना है कि अरावली न केवल थार मरुस्थल के विस्तार को रोकती है, बल्कि उत्तर भारत के भूजल स्तर और जलवायु नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कांग्रेस का आरोप है कि पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के बजाय रियल एस्टेट और खनन माफियाओं को लाभ पहुँचाने के लिए नियमों में ढील दी जा रही है। फिलहाल, केंद्र सरकार ने राज्यों को पर्वत श्रृंखला के भीतर नई खनन लीज न देने के निर्देश जारी किए हैं।













