Thursday, October 1, 2026
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Bangladesh Violence : उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा, मीडिया दफ्तरों में आगजनी, पत्रकार की हत्या

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उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा

नई दिल्‍ली. बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। शेख हसीना विरोधी नेता और छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरे उस्मान हादी की मौत के बाद देशभर में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे हैं। राजधानी ढाका समेत कई शहरों में तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की घटनाओं ने सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

उस्मान हादी की मौत के बाद उग्र प्रदर्शन
उस्मान हादी की मौत के विरोध में शुक्रवार को बड़ी संख्या में छात्र और आम नागरिक शाहबाग चौराहे पर इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में झंडे लेकर नारेबाजी की और हादी को ‘शहीद’ बताते हुए न्याय की मांग की। छात्रों का कहना है कि वे हादी के खून को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।हादी जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल थे। 12 दिसंबर को चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें सिर में गोली मारी गई थी। इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां छह दिन बाद उनकी मौत हो गई।

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मीडिया संस्थानों और राजनीतिक दफ्तरों पर हमला
गुरुवार देर रात उग्र भीड़ ने बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में घुसकर तोड़फोड़ और आगजनी की। इसके साथ ही पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास में भी तोड़फोड़ की गई।
हिंसा की चपेट में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का कार्यालय भी आया, जिसे प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया।

पत्रकार की गोली मारकर हत्या
इस बीच, खुलना जिले में वरिष्ठ पत्रकार इमदादुल हक मिलन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। वह शालुआ प्रेस क्लब के अध्यक्ष थे। पुलिस के अनुसार, गुरुवार रात करीब 9:30 बजे चाय की दुकान पर बैठे मिलन पर बाइक सवार हमलावरों ने फायरिंग की और फरार हो गए। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमलावरों की पहचान अब तक नहीं हो सकी है।

हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग
बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, धर्म के अपमान के आरोप में एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को नग्न अवस्था में पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई। यह घटना भालुका इलाके की बताई जा रही है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा ने मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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