Hostel superintendent harassment : बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के सिलावद स्थित आदिवासी बालक आश्रम में छात्रावास अधीक्षक और छात्रों के बीच तनाव की स्थिति बन गई है। अधीक्षक के कथित दुर्व्यवहार और प्रताड़ना से तंग आकर 50 से अधिक छात्र सोमवार को उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए पैदल ही जिला मुख्यालय बड़वानी के लिए निकल पड़े। यह घटना जिले में आदिवासी छात्रों के हितों और छात्रावासों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
Hostel superintendent harassment : छात्रों को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों का समर्थन मिला है, जो उनके साथ कलेक्टर कार्यालय तक मार्च कर रहे हैं। कक्षा 11वीं के छात्र बारकेश जमरे ने आरोप लगाया कि छात्रावास अधीक्षक सयाराम नरगावे उनके साथ लगातार गाली-गलौज करते हैं और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। छात्रों ने अधीक्षक पर जान से मारने की धमकियां देने का भी गंभीर आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि कई दिनों की प्रताड़ना के बाद वे कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताना चाहते हैं।
Hostel superintendent harassment : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक अंशुमल धनगर ने बताया कि दो-तीन दिन पहले सिलावद आश्रम के बच्चों ने उन्हें फोन कर अधीक्षक के दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायत की थी। छात्रों ने छात्रावास की बदहाल स्थिति, जैसे खिड़कियों का न लगा होना और बीमार बच्चों को अस्पताल न ले जाने देने जैसी अव्यवस्थाओं की जानकारी भी दी। धनगर ने बताया कि छात्रों को समझाने के बावजूद वे कलेक्टर से मिलने पर अड़े रहे, जिसके चलते एबीवीपी सदस्यों ने उनके लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन करते हुए उनके साथ जाने का निर्णय लिया।
Hostel superintendent harassment : वहीं, छात्रावास अधीक्षक सयाराम नरगावे ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका पक्ष है कि वे केवल छात्रावास में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। नरगावे ने कहा कि वह बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजते हैं और उन्हें मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग से रोकते हैं। उन्होंने दावा किया कि बच्चे इन्हीं अनुशासनात्मक कदमों से नाराज हैं और उन पर गलत आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले उन्हें किसी भी बच्चे या अभिभावक से कोई शिकायत नहीं मिली थी।
Hostel superintendent harassment : इस संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन का हस्तक्षेप आवश्यक हो गया है ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। हॉस्टल प्रबंधन और छात्रों के बीच के इस टकराव ने एक बार फिर आदिवासी छात्रों के लिए बने शासकीय आश्रमों में सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार पर विचार करने की जरूरत को रेखांकित किया है। छात्रों की मांग है कि अधीक्षक पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें आगे किसी तरह की प्रताड़ना का सामना न करना पड़े।











