Thursday, August 27, 2026
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मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला !भारत ने बढ़ाई डीजल और ATF की एक्सपोर्ट ड्यूटी

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच दुनिया भर में कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। इसी अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने पेट्रोलियम निर्यात नीति में बड़ा बदलाव किया है।

डीजल और ATF पर बढ़ी ड्यूटी

सरकार ने डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को दोगुना कर दिया है। इसे 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, हवाई ईंधन (ATF) पर निर्यात शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। पेट्रोल पर किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है और इसकी एक्सपोर्ट ड्यूटी शून्य रखी गई है।

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क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव कम करने के लिए उठाया गया है। मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे दबाव और बढ़ गया है।

विंडफॉल टैक्स व्यवस्था के तहत बदलाव

यह संशोधन सरकार की व्यापक विंडफॉल टैक्स नीति के तहत किया गया है, जिसके जरिए रिफाइनरी कंपनियों के मुनाफे और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जाता है। सरकार समय-समय पर निर्यात शुल्क में बदलाव करती रहती है ताकि बाजार स्थिर बना रहे।

ऑयल कंपनियों पर असर

इस फैसले का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो रिफाइंड डीजल और जेट फ्यूल का निर्यात करती हैं। उनकी निर्यात लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। हालांकि पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं होने से आंशिक राहत बनी रहेगी।

आगे की स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बनी रहने तक ऐसे कदम आगे भी देखने को मिल सकते हैं। सरकार का फोकस घरेलू सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित रखने पर है।

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