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Niyad Nellanaar scheme : सुकमा में ‘नियद नेल्लानार’ योजना से ऐतिहासिक कदम, 197 आदिवासियों को बांटे गए वन अधिकार पट्टे

Niyad Nellanaar scheme : सुकमा। सुकमा जिले में कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के निर्देशन और जिला सीईओ मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में अनुसूचित जनजातियों और अन्य पारंपरिक वनवासियों को उनके वर्षों से काबिज वन भूमि का कानूनी अधिकार प्रदान करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। यह पहल ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य हजारों परिवारों की आजीविका को मजबूत करना और सतत विकास को बढ़ावा देना है।

Niyad Nellanaar scheme : चिंतलनार में भव्य आयोजन: 197 हितग्राहियों को मिला कानूनी हक

रविवार को कोंटा विकासखंड के ग्राम चिंतलनार में एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में एसडीएम कोंटा सुभाष शुक्ला और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में, 7 गाँवों के कुल 197 व्यक्तियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टे वितरित किए गए। ये ‘वन अधिकार पत्र’ उन आदिवासियों को दिए गए हैं जो पीढ़ियों से जंगलों में निवास करते आए हैं, जिससे उन्हें अपनी पारंपरिक भूमि पर कानूनी हक मिल गया है।

Niyad Nellanaar scheme : इन 7 गाँवों के ग्रामीणों को मिला वनाधिकार

इस वितरण कार्यक्रम में कोंटा विकासखंड के विभिन्न गाँवों के ग्रामीणों को लाभ मिला। इनमें केरलापेंदा के 17, पुलनपाड के 42, लखापाल के 25, तोंगपल्ली के 58, तोकनपल्ली के 17, मोरपल्ली के 23 और पेदाबोड़केल के 18 ग्रामीणों को वनाधिकार पट्टा वितरित किया गया। वन अधिकार पत्र प्राप्त होने से इन हितग्राहियों को खेती-किसानी को बढ़ावा देने और अपनी आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण सहूलियत मिल रही है।

Niyad Nellanaar scheme : वन प्रबंधन और संरक्षण की जिम्मेदारी

इस पहल के तहत स्थानीय समुदायों को न केवल भूमि का अधिकार मिला है, बल्कि उन्हें वनोपज संग्रहण और जड़ी-बूटियों के समुचित दोहन का भी कानूनी अधिकार मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। इसके साथ ही, इन समुदायों को वनों के प्रबंधन, संरक्षण और उपयोग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। यह कदम जैव विविधता की रक्षा करने और वनों की सुरक्षा में स्थानीय सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है।

Niyad Nellanaar scheme : सशक्तिकरण का माध्यम बने वन अधिकार पट्टे

वन अधिकार पट्टे सिर्फ भूमि के कानूनी दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि ये सशक्तिकरण का माध्यम हैं। इन पट्टों से अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक अधिकारों की रक्षा हो रही है और वे अब विकास योजनाओं में सक्रिय भागीदारी कर सकते हैं। यह पहल उनकी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में भी व्यापक पैमाने पर मदद कर रही है। कार्यक्रम में जनपद सीईओ सुमित ध्रुव, तहसीलदार योपेंद्र पात्रे और विभिन्न स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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