लखनऊ : उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल गया है। पंकज चौधरी को यूपी भाजपा की कमान सौंपी गई है। लखनऊ स्थित राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय परिसर के सभागार में केंद्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में उनके नाम की औपचारिक घोषणा की गई। चूंकि अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र नामांकन पंकज चौधरी का ही था, इसलिए पहले से ही उनके निर्विरोध चुने जाने के संकेत मिल चुके थे।
पीयूष गोयल ने किया शंखनाद
केंद्रीय मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचन के केंद्रीय प्रभारी पीयूष गोयल ने पंकज चौधरी के नाम का ऐलान किया। उनके घोषणा करते ही पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। इस मौके पर केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक एवं राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, प्रदेश चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भी मंच पर मौजूद रहे।पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने पार्टी का झंडा सौंपकर नव निर्वाचित अध्यक्ष को शुभकामनाएं दीं।
दिग्गज नेताओं की मौजूदगी से दिखी संगठनात्मक एकजुटता
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक, प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद के 120 नव निर्वाचित सदस्यों के नामों की भी घोषणा की गई।
कुर्मी समाज से चौथे प्रदेश अध्यक्ष बने पंकज चौधरी
पंकज चौधरी भाजपा के 17वें प्रदेश अध्यक्ष हैं और वे कुर्मी समाज से आने वाले चौथे नेता हैं जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनसे पहले विनय कटियार, ओमप्रकाश सिंह और स्वतंत्रदेव सिंह भी इस बिरादरी से प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। पार्टी के भीतर इसे सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
गोरखपुर बना सियासत का नया केंद्र
केंद्रीय राजनीति से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने वाले पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने से पूर्वांचल, खासकर गोरखपुर क्षेत्र का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अब प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी—दोनों का प्रभाव गोरखपुर क्षेत्र में मजबूत माना जाता है। ऐसे में सत्ता और संगठन की कमान एक ही क्षेत्र के नेताओं के हाथ में आना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
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संगठनात्मक चुनावों में खास रहा यह मौका
भाजपा के संगठनात्मक इतिहास में यह अवसर इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि लक्ष्मीकांत बाजपेयी के बाद यह पहला मौका है जब प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इससे संगठन के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर भी संदेश देने की कोशिश मानी जा रही है।











