सुल्तानपुर : उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में ऐसा मंदिर है जो हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए आस्था और श्रद्धा का प्रतिक बन चुका है। आज लोग दूर-दूर से यहां दर्शन करने आते हैं, और अपने मनोकामनाओं की पूरी होने की उम्मीद रखते हैं।
हिंदू और मुस्लिम दोनों का विश्वास
इस बाबत मंदिर के पुजारी गंगा प्रसाद मिश्र बताते हैं कि हिंदू श्रद्धालु भगवा या अन्य रंग की चादर, जबकि मुस्लिम श्रद्धालु हरे रंग की चादर चढ़ाते हैं। लोगों का मानना है कि जो कोई भी भरोसे और श्रद्धा के साथ बाबा के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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100 साल पुराना इतिहास और चमत्कार
आपको बता दें कि, यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। रोचक बात ये है कि जब अंग्रेजों ने सुल्तानपुर में रेल लाइन बिछाई, तो दिन में पटरी बिछती और रात में उखड़ जाती थी। लोगों को समझ नहीं आया। फिर बाबा ने सपने में रेल अफसर को यह संकेत दिया कि “मेरा स्थान पहले ठीक किया जाए, उसके बाद रेल बिछाई जाए।” और फिर रेल लाइन सही से बिछ गई।
यहां दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
मंदिर में दर्शन के लिए सिर्फ सुल्तानपुर ही नहीं, बल्कि अमेठी, रायबरेली, जौनपुर, प्रतापगढ़, अयोध्या और अंबेडकर नगर जैसे जिलों से भी लोग आते हैं। प्रसाद में लड्डू, पेड़ा और खुरमा चढ़ाए जाते हैं। खास बात यह कि हर गुरुवार मंदिर में भारी भीड़ उमड़ती है।
जानें कैसे पहुंचे यहां ?
यदि आप भी इस विचित्र और चमत्कारी मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो यह सुल्तानपुर शहर से 2 किमी दूर पयागीपुर स्थित आईटीआई कालेज प्रांगण के बगल में स्थित है। भीड़ से बचना हो तो गुरुवार के अलावा किसी अन्य दिन जाएं।













