Rationalizing : धरसीवां। (मोहम्मद याकुब) : छत्तीसगढ़ में युक्तियुक्तीकरण प्रक्रिया से उत्पन्न गंभीर विसंगतियों के विरोध में युक्तियुक्तीकरण पीड़ित शिक्षक संघ, छत्तीसगढ़ ने आज, 14 नवंबर 2025 को रायपुर के नगर घड़ी चौक में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे बैठकर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्थाओं और विभागीय मनमानी के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की और आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया ने हजारों शिक्षक परिवारों को आर्थिक, मानसिक और प्रशासनिक विपरीत परिस्थितियों में धकेल दिया है।
धरना उपरांत शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर रायपुर तथा जिला पुलिस अधीक्षक रायपुर को सौंपा। ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मुद्दे उठाए गए:
वरिष्ठता निर्धारण में गंभीर त्रुटियाँ: कनिष्ठ शिक्षकों को प्राथमिकता देकर वरिष्ठों को अनुचित रूप से “अतिशेष” घोषित करना।
Rationalizing : आर्थिक उत्पीड़न: न्यायालयीन मामले के बावजूद शिक्षकों का 5-6 महीने से वेतन रोककर रखना।
नियमानुसार अनदेखी: वास्तविक रिक्त पदों को छिपाकर मनमानी पदांकन करना तथा पति-पत्नी आधार एवं गंभीर बीमारी आधारित मामलों की अनदेखी करना।
संघ के नेता नजीब अशरफ ने कहा कि यह स्थिति न केवल शिक्षा विभाग, बल्कि शासन के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
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Rationalizing : “अफसरशाही की मनमानी से लड़ाई है” — 24 नवंबर से राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी
धरना स्थल पर प्रमुख वक्ताओं ने विभागीय कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए। संघ के वक्ता शानू रज़ा ने कहा कि, “हमें युक्तियुक्तीकरण से बैर नहीं, अन्याय और अफसरशाही की मनमानी से लड़ाई है।” उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों को ताक पर रखकर की जा रही प्रक्रियाओं ने भ्रष्टाचार और अपारदर्शी निर्णयों से प्रणाली को खोखला कर दिया है।
संघ ने मांग की है कि वरिष्ठता व विभागीय त्रुटियों का पुनरीक्षण किया जाए, वास्तविक रिक्त पदों का प्रकाशन हो और रोका गया वेतन तत्काल जारी किया जाए।
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 14 नवंबर को दिए गए ज्ञापन पर उचित कार्यवाही नहीं होती है, तो 24 नवंबर 2025 से युक्तियुक्तीकरण पीड़ित शिक्षक संघ अनिश्चितकालीन हड़ताल करेगा। यह आंदोलन पारदर्शिता, न्याय, और सम्मानजनक सेवा-परिस्थितियों की बहाली के लिए है, जिसका सीधा असर राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना तय है।











