सिंगरौली। एनर्जी कैपिटल कहलाने वाला सिंगरौली जिला लंबे समय से विस्थापन, प्रदूषण, शोषण और बेरोजगारी की चुनौतियों से जूझ रहा था। लेकिन इस बार जिले में दो महत्वपूर्ण आयोजन — मंगलवार को कलेक्टर गौरव बैनल की “जनसुनवाई” और बृहस्पतिवार को आयोजित “रोजगार मेला” — ने प्रशासनिक भरोसे की नई उम्मीद जगाई।
जनसुनवाई में उम्मीदों की भीड़
जनसुनवाई में 500 से अधिक आवेदनपत्रों पर स्वयं कलेक्टर ने संज्ञान लिया। आम नागरिकों ने देखा कि प्रशासन उनके मुद्दों को गंभीरता से सुन रहा है और समाधान के प्रयास कर रहा है।
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रोजगार मेला: युवाओं को रोजगार और दिशा
“युवा संगम” रोजगार मेले में 13 कंपनियों ने 469 युवाओं का प्रारंभिक चयन किया। 17 महिलाओं को रोजगार लाभ मिला, जबकि 40 युवाओं ने करियर काउंसलिंग के जरिए नया मार्ग अपनाया। इस आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि प्रशासनिक पहल के प्रति जनता में भरोसा अभी भी मौजूद है।
बैनल स्टाइल — सुनना, समझना और हल निकालना
कलेक्टर गौरव बैनल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर आवेदन सिर्फ़ कागज़ नहीं, बल्कि एक उम्मीद है। हर शिकायत का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनकी यह संवेदनशील और सक्रिय शैली लोगों के मन में भरोसा लौटाने में कामयाब रही।
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इतिहास और नई शुरुआत
सिंगरौली ने पिछली बार ऐसा जनसैलाब 2009-11 में कलेक्टर पी. नरहरि के कार्यकाल में देखा था। अब 15-16 साल बाद इसी भरोसे की लौ फिर जली है। हालांकि लोग अभी भी विस्थापन, प्रदूषण और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, लेकिन उनके चेहरों पर अब शिकायत से अधिक आशा दिखाई दे रही है।
भरोसा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण
जनता का विश्वास हासिल करना एक बात है, उसे बनाए रखना उससे कहीं कठिन। औद्योगिक और राजनीतिक दबावों के बीच कलेक्टर गौरव बैनल के लिए यह नैतिक और प्रशासनिक चुनौती होगी कि वे इस भरोसे को स्थायी बनाएं।
सिंगरौली की जनता ने वर्षों बाद प्रशासन पर भरोसा जताया है और अब यह कलेक्टर गौरव बैनल के नेतृत्व की असली परीक्षा है।











