सिंगरौली। जिले में बृहस्पतिवार को शिक्षा, बेरोजगारी, प्रदूषण और विस्थापन जैसे अहम मुद्दों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने जोरदार प्रदर्शन किया। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे के नेतृत्व में सैकड़ों छात्र कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इस दौरान कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था में फैली अव्यवस्थाओं, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में संसाधनों की कमी और छात्र संघ चुनावों की बहाली जैसी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे।
सुबह से ही कार्यकर्ता हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर शहर के विभिन्न इलाकों से रैली निकालते हुए जिला मुख्यालय पहुंचे। जैसे ही प्रदर्शनकारी कलेक्टर कार्यालय के गेट तक पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया था। जब छात्र नेताओं ने कलेक्ट्रेट के अंदर घुसने की कोशिश की तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर उन्हें पीछे हटाया।
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प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के नेताओं ने कहा कि प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। परीक्षाओं और परिणामों में अनियमितताएं बढ़ती जा रही हैं, और कॉलेजों में आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है। इसके चलते छात्रों का भविष्य अधर में है। साथ ही, छात्र संघ चुनाव न कराकर सरकार छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज दबा रही है। चौकसे ने चेतावनी दी कि यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन जिला स्तर से राज्य स्तर तक फैलाया जाएगा।
एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि सिंगरौली में कोयला खदानों और उद्योगों की भरमार के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा। कंपनियां स्थानीय लोगों को नियमानुसार 70% रोजगार नहीं दे रही हैं। विस्थापन का दर्द झेल रहे लोग भी आज तक न्याय की बाट जोह रहे हैं। इस प्रदर्शन में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय कांग्रेस नेता और छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सिर्फ सिंगरौली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे मध्य प्रदेश में चलाया जाएगा। यह छात्रों के हक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और रोजगार के लिए लड़ाई है, जो सरकार को सुननी ही होगी। प्रदर्शन का समापन कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किया गया, जिसमें सभी समस्याओं को तत्काल सुलझाने की मांग की गई।











