अजब-गजब : 8 जिंदा मेंढक आखिर क्यों निगल गई महिला…

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अजब-गजब
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अजब-गजब : चीन। चीन में एक वर्षीय महिला के साथ हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पीठ के दर्द से राहत पाने के लिए एक या दो नहीं बल्कि जिंदा मेंढक निगल लिए। मेंढक निगलने के बाद महिला के पेट में तेज दर्द उठा, जिसके बाद डॉक्टरों ने जांच की तो उसके शरीर में गंभीर परजीवी संक्रमण का पता चला।

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अजब-गजब : साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, झांग नामक इस महिला ने कहीं से सुन लिया था कि जिंदा मेंढक खाने से पीठ का दर्द ठीक हो जाता है। दर्द से परेशान झांग ने इस बात को सच मान लिया और अपने बेटे से हथेली के बराबर लंबाई-चौड़ाई वाले कुछ छोटे मेंढक पकड़ लाने को कहा। परिवार को यह नहीं बताया गया कि वह इन मेंढकों का क्या करने वाली थी।

पेट में जिंदा मेंढक, स्थिति बिगड़ी

झांग ने पहले दिन मेंढक निगले और अगले दिन और मेंढक निगल लिए, जिससे कुल जिंदा मेंढक उसके पेट में चले गए। इसके कुछ ही समय बाद झांग को तेज पेट दर्द और असहजता महसूस होने लगी।

महिला के बेटे ने डॉक्टर को बताया, “मेरी माँ ने जिंदा मेंढक निगल लिए हैं। अब उन्हें इतना दर्द है कि वह चल भी नहीं पा रही हैं।” स्थिति बिगड़ने पर उसे तुरंत झेजियांग प्रांत के हांग्जो स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पाचन तंत्र को नुकसान और परजीवी का हमला

डॉक्टरों ने जब झांग की गहन जांच की, तो पता चला कि जिंदा मेंढक खाने के कारण उनके पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा है। सबसे खतरनाक बात यह थी कि उनके शरीर में स्पार्गनम नामक परजीवी (Parasite) प्रवेश कर गया था।

डॉक्टरों ने बताया कि यह परजीवी आमतौर पर दूषित पानी या अधपके मांस से शरीर में प्रवेश करता है, लेकिन जीवित मेंढक निगलने से संक्रमण होना असामान्य नहीं है। परजीवी संक्रमण के चलते झांग के शरीर में ऑक्सीफिल सेल्स की मात्रा बढ़ गई थी, जो गंभीर संक्रमण का संकेत देती है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि इलाज में थोड़ी भी देरी होती, तो संक्रमण शरीर के अन्य अंगों तक फैल सकता था।

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हफ्ते के इलाज के बाद मिली छुट्टी

डॉक्टरों की टीम ने हफ्ते तक झांग का गहन इलाज किया। हालत में सुधार होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि आगे से किसी भी लोक-उपचार या अप्रमाणित घरेलू नुस्खों पर बिल्कुल भी विश्वास न करें। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने जनता को चेतावनी दी है कि पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित ऐसे उपचार जानलेवा साबित हो सकते हैं और किसी भी बीमारी की स्थिति में वैज्ञानिक तरीकों से उपचार ही करवाना चाहिए।

 

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