बच्चों में तेजी से बढ़ते टाइप-2 डायबिटीज़ के मामलों को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक अनूठा कदम उठाया है। बोर्ड ने देशभर के सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे कैंपस में ‘शुगर बोर्ड’ अनिवार्य रूप से लगाएं।
इन बोर्डों के ज़रिए छात्रों को चीनी के अत्यधिक सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों जैसे मोटापा, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूक किया जाएगा। यह पहल स्कूली स्तर पर बच्चों की आदतों में बदलाव लाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां टाइप-2 डायबिटीज़ को वयस्कों की बीमारी माना जाता था, अब यह छोटे बच्चों और किशोरों में भी आम होती जा रही है। CBSE की यह पहल न केवल शिक्षा बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अहम बदलाव की शुरुआत मानी जा रही है।











