Dussehra 2025: दशहरा यानी अच्छाई की बुराई पर जीत का पर्व, जब पूरे भारत में भगवान राम की रावण पर विजय का जश्न मनाया जाता है। जगह-जगह रामलीला होती है, रावण के विशाल पुतलों का दहन किया जाता है और आतिशबाजी से आसमान रोशन हो उठता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसा समुदाय भी है जो इस दिन उत्सव नहीं बल्कि शोक मनाता है?
Dussehra 2025: यह समुदाय है गोधा श्रीमाली समाज, जो खुद को रावण का वंशज मानता है। दशहरे के दिन यह समुदाय रावण दहन को देखने के बाद शुद्धि के लिए स्नान करता है, फिर जनेऊ बदलकर भोजन करता है।
Dussehra 2025: मान्यता है कि त्रेता युग में रावण और मंदोदरी की शादी के समय, जब रावण की बारात मंडोर (जोधपुर) से गुजरी थी, तब उसमें शामिल गोधा परिवार वहीं बस गया था। उसी समय से यह समुदाय खुद को रावण का वंशज मानने लगा।
Dussehra 2025: जहां अधिकांश हिंदू दशहरे पर भगवान राम की विजय का उत्सव मनाते हैं, वहीं यह समुदाय रावण की बुद्धि, वेद ज्ञान और बलशाली व्यक्तित्व का सम्मान करता है। वे उसे केवल राक्षस नहीं बल्कि एक महान पंडित और शिवभक्त मानते हैं।
Dussehra 2025: जोधपुर के सूरसागर में स्थित मेहरानगढ़ किले के पास एक **रावण मंदिर** भी है, जिसे गोधा श्रीमाली समाज के कमलेश दावे ने बनवाया था। इस मंदिर में दशहरे के दिन रावण की विशेष पूजा होती है।
Dussehra 2025: मंदिर में पूजा करने वाले पुजारी खुद को रावण का वंशज मानते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए उसकी स्मृति में पूजा-अर्चना करते हैं। दशहरे पर जहां पूरा देश रावण के अंत का उत्सव मनाता है, वहीं गोधा श्रीमाली समाज इस दिन उसे श्रद्धांजलि देकर अपनी परंपरा निभाता है – यह भारत की विविधता और सांस्कृतिक गहराई का अनोखा उदाहरण है।













